ग्राम जुनवानी : सामाजिक चेतना से राजनैतिक चेतना तक
ब्रिटिश काल से जनजागरण की गौरव-गाथा (1937-2026)
लेखक : डॉ. अनिल कुमार भतपहरी (9617777514)
प्राध्यापक, जुनवानी, रायपुर (छत्तीसगढ़)
प्रस्तावना : चार भाइयों का बसाया ग्राम और उसका विशिष्ट महत्व
भतपहरी एवं परिवार जुनवानी - ललवा, नोहरा, भारत, बंशी चार भाइयों द्वारा बसाया गया ऐतिहासिक ग्राम जुनवानी, विकासखंड पलारी, जिला रायपुर आज प्रदेश में विशिष्ट महत्व रखता है।
इस ग्राम में सतनाम पंथ प्रवर्तक गुरु घासीदास, शहीद वीर नारायण सिंह, अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं. विद्याचरण शुक्ल, छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी जैसी प्रसिद्ध हस्तियों का आगमन हुआ है। वहीं डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के पुण्य स्मरण एवं परिनिर्वाण दिवस पर आयोजन कर दो विपरीत विचारधाराओं में समन्वय की परम्परा भी विकसित हुई है। इनके सूत्रधार रहे ग्राम के बड़े-बुजुर्ग, जिनके आशीष से यह छोटा सा ग्राम आज भी जीवंत है।
किसी आयोजन के समाप्त होने के बाद हम पर्चे, पोस्टर, बैज को बेकार समझकर फेंक देते हैं। लेकिन यही संभालकर रखे जाएँ तो ऐतिहासिक दस्तावेज बन जाते हैं। लगभग 1995 का यह पर्चा - महंत स्व. श्री नंदू नारायण भतपहरी जी की 5वीं पुण्यतिथि (10-11-1995) के अवसर पर आयोजित आमसभा का है (सिन्हा प्रिंटर्स, मोवा, रायपुर द्वारा मुद्रित) - जुनवानी के 90 वर्षीय जनजागरण का साक्ष्य है।
खंड 1 : प्रथम जागरण - बाल समाज (1937)
आजादी के पूर्व 1937 में 'बाल समाज' की स्थापना हुई। प्रणेता द्वय थे - डेढ़ शाला मंत्री नकुल देव ढीढी जी और **महंत नंदू नारायण भतपहरी जी (जन्म 1916)**।
भतपहरी जी एक साधारण कृषक परिवार में जन्मे। ब्रिटिश काल में गीधपुरी मिडिल स्कूल से सातवीं कक्षा में उन्होंने सम्पूर्ण रायपुर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वे अखिल भारतीय सतनामी महासभा (पंजीयन क्र. 65) के प्रथम अध्यक्ष और बाबा साहब के सान्निध्य में शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन, महाकौशल प्रांत के प्रथम अध्यक्ष बने। उनका परिनिर्वाण 1990 में हुआ।
खंड 2 : संसाधन का अनूठा मॉडल (1938-39)
जयंती हेतु 1938-39 में प्रति घर एक बोरा धान एकत्र किया गया - कुल लगभग 50 बोरा। उसे बेचकर रायपुर से बैटरी वाला माइक सेट खरीदा गया, जिसे बैलगाड़ी से भैंसा बस स्टैंड से ग्राम लाया गया। यही माइक क्रांति का साधन बना - आसपास सभाएँ, रैलियाँ, पंथी नृत्य, भजन-कीर्तन, कव्वाली होने लगीं। अंत में मंत्री जी और महंत जी का उद्बोधन होता। रात्रि में पेट्रोमैक्स लगाकर गम्मत-नाच होते थे।
खंड 3 : पीढ़ी-दर-पीढ़ी विकास
प्रथम पीढ़ी (बाल समाज): चैतू, चैतराम, मनोहर लाल, भुवनलाल, बिहारी लाल, जीवनलाल (सुकालदास), किशन लाल, किसलाल, जोहन लाल, फत्तेलाल, बुधेलाल, राधेलाल, मनीराम, जमुना, साधुराम, कार्तिक, बरातू। ये आगे चलकर वकील, शिक्षक, फौज, बीएसपी जैसी सेवाओं में गए - नवजागरण के असल सिपाही।
द्वितीय पीढ़ी (पंथी पीढ़ी): प्रेमदास, कनकदास, चरणदास, आशा, सुनहर दास, भोकवा, बाठुल, जयनंद, जितेंद्र, पवन, अशोक, सुधारण, कार्तिक, सराधु, हरिश्चन्द्र, मदन। इनकी पंथी पार्टी प्रसिद्ध थी, गिरौदपुरी के मंच पर सम्मानित हुई। इसी पीढ़ी ने दस दिवसीय गुरु गद्दी पूजा की नींव रखी।
तृतीय पीढ़ी - युवा जागृति मंच (1984): 1984 में इंदिरा गांधी जी की हत्या के बाद जनरल प्रमोशन से खाली समय में शिक्षक श्री सुकालदास भतपहरी जी ने पुत्र अनिल भतपहरी के नेतृत्व में 'युवा जागृति मंच' बनाया। सदस्य - चेतन, आत्मा, उभे, शिवकुमार, जैनेंद्र, सुमरन, उजेन, चित्रांगद, नारायण, आजुराम, राजकुमार, संतोष, अरुण, गजाधर, लक्ष्मण, माधो, दिलीप, इतवारी। इन्होंने पाम्पलेट प्रकाशित कर गुरु गद्दी पूजा को व्यवस्थित किया। संचालन सुकालदास जी ने ही किया।
इसी दौर में सुनील भतपहरी (एम.एड) ने जय सतनाम कबड्डी टीम व सतनाम क्रिकेट क्लब बनाया। छोटे भाई सुशील भतपहरी 'क्लोन सचिन तेंदुलकर' के नाम से प्रसिद्ध शानदार बल्लेबाज थे। डॉ. अनिल भतपहरी के मैनेजरशिप में अनेक प्रतियोगिताएँ जीती गईं। सतनाम भवन मेडल-शील्ड से सजा प्रेरणा स्थल बना।
खंड 4 : सामाजिक चेतना से राजनैतिक चेतना
ग्राम में प्राचीन समय से काली फर्शी खदान के व्यवसाय से आर्थिक समृद्धि थी, अतएव नवाचार हुए। सतनाम धर्म के चतुर्थ उत्तराधिकारी धर्मगुरु अगमदास और गुरु महंत नयनदास के गौरक्षा आंदोलन से उत्साहित होकर श्री प्यारी टंडन स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए और उन्हें आजीवन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन मिली। वहीं दूसरी ओर डॉ. अम्बेडकर की विचारधारा से समता सैनिक दल का गठन हुआ।
1952 के प्रथम आम चुनाव में मंत्री नकुल देव ढीढी रायपुर लोकसभा से SCF प्रत्याशी बने - पूरा गाँव प्रचार में उमड़ा। बाद में RPI गठन पर महंत नंदू नारायण महाकौशल प्रांत अध्यक्ष बने, पलारी विधानसभा से लड़े और पलारी जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष रहे (अध्यक्ष - तिलक वर्मा जी)। उनके बाद एड. भीष्म देव ढीढी महासमुंद लोकसभा और एड. मनोहर लाल भतपहरी रायपुर लोकसभा से RPI प्रत्याशी रहे। म.प्र. शासन में एड. भुवनलाल भतपहरी अनु. जाति आयोग में राज्य मंत्री दर्जा के अध्यक्ष बने।
इसी प्रतिष्ठा से अनेक प्रतिष्ठित परिवारों की रिश्तेदारी जुड़ी। डॉ. शिवकुमार डहरिया जी का ससुराल जुनवानी बना - वे पलारी विधायक और बाद में छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री बने। सुनील भतपहरी जिला पंचायत सदस्य, सरपंच, पानी पंचायत अध्यक्ष रहे। वर्तमान में कैबिनेट मंत्री श्री दयालदास बघेल जी की सुपुत्री भी यहाँ की बहू हैं।
उपसंहार
गुरु घासीदास जयंती, अइटका तिहार, गुरु गद्दी पूजा, पंथी, कबड्डी और क्रिकेट टीमों ने सामाजिक एकता का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी निरंतर शैक्षिक जागरूकता का परिणाम है कि आज ग्राम के प्रायः हर घर से स्नातक, शिक्षक, शासकीय सेवक रायपुर, बलौदाबाजार, महासमुंद, आरंग, खरोरा में फैले हुए हैं।
जुनवानी की यात्रा बताती है - एक बोरा धान से माइक आया, माइक से आवाज आई और आवाज से अधिकार की चेतना जगी।
डॉ अनिल कुमार भतपहरी
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