Thursday, August 20, 2026

भारत के जातिविहीन सतनामी समाज में शिक्षा, संगठन और संघर्ष: नवजागरण के नए क्षितिज


भारतवर्ष के जातिविहीन सतनामी समाज में शिक्षा, संगठन और संघर्ष : नवजागरण के नए क्षितिज"

*लेखक : डॉ. अनिल कुमार भतपहरी, प्राध्यापक, समाजशास्त्र, रायपुर, छत्तीसगढ़*

*सार (Abstract)*
प्रस्तुत शोध-पत्र गुरु घासीदास प्रवर्तित सतनाम पंथ के 'मनखे-मनखे एक समान' के मूल दर्शन से प्रारम्भ होकर, 21वीं सदी के छत्तीसगढ़ में सतनामी अस्मिता के संकट एवं संभावनाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन है। शोध प्रविधि के रूप में ऐतिहासिक-विश्लेषणात्मक एवं सहभागी अवलोकन का प्रयोग किया गया है। निष्कर्षतः यह स्थापित किया गया है कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण (2000) के 25 वर्षों बाद भी, 12% जनसंख्या और निर्णायक राजनैतिक उपस्थिति (10 विधायक, 2 लोकसभा, 1 राज्यसभा) के बावजूद समाज 'नेतृत्व के संकट' से जूझ रहा है। 2024 के बलौदाबाजार जैतखाम कांड के बाद सर्वदलीय मौन इसका ज्वलंत प्रमाण है। शोध में शिक्षा के क्षेत्र में हुई क्रांतिकारी प्रगति (प्रथम महिला IFS विजया रात्रे, 2025 में प्रथम IAS संजय डहरिया, NASA में वैज्ञानिक) को आशा की किरण के रूप में चिन्हित करते हुए, 'रावटी दर्शन यात्रा' को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया है।

*मूल शब्द :* सतनाम पंथ, गुरु घासीदास, जातिविहीन समाज, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, नवजागरण, रावटी दर्शन।

*1. प्रस्तावना : 'कलयुगे संघे शक्तिः'*
भारतीय धर्मशास्त्रों में कलियुग के लिए 'संघे शक्तिः' का सूत्र दिया गया है। सतनामी समाज के लिए यह केवल सूत्र नहीं, जीवन-पद्धति है। 18वीं शताब्दी में जब सम्पूर्ण भारत जाति-व्यवस्था की जकड़न में था, तब छत्तीसगढ़ की धरती पर गुरु घासीदास बाबा ने 'सतनाम' का उद्घोष किया। यह धर्म नहीं, बल्कि वर्ण-व्यवस्था के विरुद्ध प्रथम संगठित विद्रोह था। उन्होंने सफेद ध्वज, जैतखाम और 'सात-सत, सतनाम' के माध्यम से एक जातिविहीन, शोषण-विहीन समाज की परिकल्पना दी।

प्रश्न यह है कि उसी समाज की वर्तमान दशा क्या है?

*2. शिक्षा का समाजशास्त्र : मैकाले से NASA तक की यात्रा*

*2.1. अंधकार युग :* हमारे बुजुर्ग बताते हैं कि गढ़ों के राजाओं और मराठा-भोंसले शासन काल में छत्तीसगढ़ में शिक्षा शून्य थी। राजकाज चलाने के लिए अन्य प्रांतों (महाराष्ट्र, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश) से कुछ अक्षर-ज्ञान वाले लिपिकों को लाकर बसाया जाता था। स्थानीय मूल निवासी, विशेषकर सतनामी समाज, बेगार और निरक्षरता में जकड़ा था।

*2.2. चेतना का प्रथम प्रकाश :* अंग्रेजी हुकूमत ने अपने 'क्लर्क' पैदा करने के लिए लॉर्ड मैकाले की अनुशंसा पर स्कूल खोले। उद्देश्य भले ही औपनिवेशिक था, पर परिणाम क्रांतिकारी हुआ। इसी शिक्षा ने हमें 'गुलामी क्या है' सिखाया। प्रथम पीढ़ी के साक्षर सतनामियों ने 1915 में अंग्रेजों के विरुद्ध 'गौरक्षा एवं बेगार विरोधी आंदोलन' किया। यह छत्तीसगढ़ का प्रथम किसान आंदोलन था। यहीं से शिक्षा, संगठन और संघर्ष का त्रिकोण बना।

*2.3. वर्तमान स्वर्णिम युग :* आज तस्वीर बदल चुकी है। यह आँकड़ा नहीं, गर्व है।

आज समाज में 500+ डॉक्टर, 1000+ इंजीनियर, सैकड़ों प्राध्यापक, दर्जनों डिप्टी कलेक्टर/कलेक्टर, DSP/SP हैं। न्यायपालिका में भी समाज के लोग जज और वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में हैं।

दो नाम विशेष उल्लेखनीय हैं :
*क) कु. विजया रात्रे :* समाज की प्रथम महिला जो भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हुईं।
*ख) श्री संजय डहरिया (2025) :* जिनका भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयन होना, सम्पूर्ण समाज के लिए दीपावली जैसा पर्व था।

वैश्विक फलक पर NASA में कार्यरत वैज्ञानिक श्री रूपेश भारद्वाज, डॉ. निराला, तथा सिलिकॉन वैली में सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट के रूप में कार्यरत श्री भूपेंद्र रात्रे, श्री ओम प्रकाश बघेल, सुश्री अतिशा बंजारे जैसे युवा प्रमाण हैं कि प्रतिभा किसी जाति की मोहताज नहीं। साहित्य में भी समाज के लेखकों को साहित्य अकादमी तक सम्मान मिले हैं।

*3. छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद : उम्मीद और मोहभंग*
2000 में जब छत्तीसगढ़ बना, तो सतनामी समाज ने सोचा - "अब हमारा राज आएगा"। 90 में से 10 सीटें आरक्षित, 2 लोकसभा सुरक्षित, 1 राज्यसभा में प्रतिनिधित्व और 12% वोट बैंक - यह किसी भी समाज के लिए निर्णायक था।

परन्तु 25 वर्षों का लेखा-जोखा क्या कहता है?
समाज आज भी 'वोट बैंक' है, 'पावर बैंक' नहीं। 2024 में बलौदाबाजार में पवित्र जैतखाम को क्षतिग्रस्त किया गया। पूरा समाज सड़कों पर था। परन्तु आश्चर्य देखिए, सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी दलों ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली। इससे स्पष्ट हुआ कि हमारा कोई स्वतंत्र, मुखर, प्रखर नेतृत्व नहीं है जो बिना पार्टी लाइन के समाज के लिए खड़ा हो सके।

*4. प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज : एक नई आशा*
इसी नेतृत्व-शून्यता में 'प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज' का उदय हुआ। यह पारम्परिक सामाजिक संगठनों से भिन्न है।

इसकी विशेषता है :
1. यह 'विरोध' नहीं 'संवाद' में विश्वास करता है।
2. यह केवल सतनामी नहीं, बल्कि सभी शोषित, पिछड़ा, आदिवासी और सर्वसमाज से समन्वय का पक्षधर है।
3. यह पढ़े-लिखे बौद्धिक वर्ग (डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर) का संगठन है।

हाल ही में संस्थापक अध्यक्ष इंजी. लखनलाल कोशले जी का तीसरी बार निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना, समाज में इस संगठन की स्वीकार्यता और स्थिरता का प्रमाण है।

*5. भविष्य का रोडमैप : तीन प्रस्ताव*

*प्रस्ताव 1 : रावटी दर्शन यात्रा का राष्ट्रीयकरण*
गुरु घासीदास जी ने जिन 9 स्थानों पर तप किया - गिरौदपुरी, भंडारपुरी, तेलासी, कोसमी, मड़वा, कुटेना आदि - वे आज भी कच्चे रास्तों पर हैं। सरकार से माँग हो कि इन्हें 'बौद्ध सर्किट' या 'राम वन गमन पथ' की तर्ज पर 'सतनाम रावटी सर्किट' के रूप में विकसित किया जाए। प्रतिवर्ष दिसम्बर में 'रावटी दर्शन यात्रा' का आयोजन हज और चारधाम की तरह सरकारी सहायता से हो। ये तीर्थ नहीं, हमारे शक्ति-स्तंभ हैं।

*प्रस्ताव 2 : अइटका मेला को राजकीय मेला घोषित करना*
आषाढ़ पूर्णिमा को तेलासी में गुरु अमरदास जी की जयंती पर लगने वाला 'अइटका मेला' सतनाम पंथ का सबसे प्राचीन पर्व है। यह 'जाति-प्रथा के अंत' का उत्सव है। इसे 'राजिम कुंभ' की तरह राजकीय मेले का दर्जा मिलना चाहिए।

*प्रस्ताव 3 : युवा सशक्तिकरण मिशन*
हर जिले में समाज द्वारा 'गुरु घासीदास कैरियर गाइडेंस सेंटर' खोला जाए जहाँ UPSC, PSC, JEE, NEET की निःशुल्क तैयारी, कौशल विकास और सबसे महत्वपूर्ण - नशा मुक्ति परामर्श दिया जाए। आज निजीकरण और बेरोजगारी के कारण युवा हताशा में नशे की ओर जा रहा है, उसे रोकना होगा।

*6. निष्कर्ष*
अंत में, हम कह सकते हैं कि सतनामी समाज के पास इतिहास है, जनसंख्या है, और अब शिक्षा भी है। कमी केवल एक बात की है - सुसंगठित, दूरदर्शी और ईमानदार संगठन की।

यदि प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज इस 'शिक्षा, संगठन और संघर्ष' के मंत्र को लेकर चलता है, तो वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ का यह 'जातिविहीन मॉडल' पूरे भारत को सामाजिक समता का मार्ग दिखाएगा।

*संदर्भ ग्रंथ सूची*
1. घासीदास, गुरु : सतनाम दर्शन
2. डॉ. हीरालाल : छत्तीसगढ़ का इतिहास

जय सतनाम जय हिंद

डॉ. अनिल कुमार भतपहरी
प्राध्यापक, हिंदी 
रायपुर, छत्तीसगढ़
*मो. 9617777514 | anilbhatpahari@gmail.com 


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