दस्तावेजी संस्मरणक आलेख
मोती महल सतनाम गुरुद्वारा, भंडारपुरी के जीर्णोद्धार की बातें - 1962 से...
आज नीलेश अनंत जी के माध्यम से उनके दादा जी द्वारा संरक्षित एक ऐतिहासिक दस्तावेज प्राप्त हुआ। यह 18 दिसंबर 1962 को भंडारपुरी में मनाई गई तीसरी गुरुघासीदास जयंती का आम सूचना पाम्पलेट है।
इस पाम्पलेट से स्पष्ट होता है कि भंडारपुरी गुरुद्वारा (मोती महल) के जीर्णोद्धार की चर्चा आज से नहीं, बल्कि 65 वर्ष पूर्व से होती आ रही है।
इस पाम्पलेट की महत्वपूर्ण बातें -
1. तब मिनीमाता जी सांसद थीं। उन्हीं के आह्वान पर अखिल भारतीय सतनामी महासमिति एवं मध्यप्रदेश दलित वर्ग संघ द्वारा भंडारपुरी में तीसरी जयंती का भव्य आयोजन किया गया था। ज्ञात हो कि 1960 के पूर्व तक भंडारपुरी में जयंती नहीं मनाई जाती थी। 2. 18 दिसंबर जयंती की मूल परम्परा 1936 में भोरिंग-जुनवानी से मंत्री नकुल देव ढीढी एवं मेरे पूज्य पिताजी महंत नंदू नारायण भतपहरी ने प्रारंभ की थी, जो आज "गुरुपर्व" के रूप में प्रतिष्ठित है। 3. इस 1962 के पाम्पलेट में ही मुख्य एजेंडा था - "भंडार के मंदिर का जीर्णोद्धार"।
मेरी आँखों देखी घटना - 1992
अनेक उतार-चढ़ाव के बाद अंततः 1992 में भंडारपुरी मेला सभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा जी ने गुरुद्वारा को पुरातत्व विभाग के अधीन लेकर जीर्णोद्धार की घोषणा की थी। उस मंच पर भाजपा की वरिष्ठ नेत्री ग्वालियर राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी भी उपस्थित थीं।
उस अवसर पर परम पूज्य गुरु मनमोहन दास जी ने उन्हें गुरुद्वारा की जीर्ण-शीर्ण स्थिति दिखाई और जीर्णोद्धार की मांग रखी, तब मैं स्वयं (अनिल भतपहरी) वहां उपस्थित था।
दुर्भाग्य से कुछ ही दिनों बाद बाबरी मस्जिद कांड के बाद उनकी सरकार गिर गई। फिर कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार आई और अंततः पुराने ढांचे को ध्वस्त कर पुनर्निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हुई, जो आज तक अपूर्ण है।
यानि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र "मोती महल सतनाम गुरुद्वारा" पिछले 65 वर्षों से क्षत-विक्षत अवस्था में है। दोनों दलों की अनेक सरकारें आईं-गईं, पर हालात वहीं के वहीं हैं।
वर्तमान सरकार से बड़ी उम्मीद है कि उसके शेष कार्यकाल (जीर्णोद्वार हेतु 17 करोड़ की घोषणा हुई है)में गुरुद्वारा का लोकार्पण हो जाए, ताकि हम जैसे अनेक प्रणधारियों का यह प्रण कि "जब गुरुद्वारा पूर्ण होगा, तभी उस मेले में सम्मिलित होंगे" साकार हो सके। कार्य प्रगति पर हैं इनकी सूचनाएं सोसल मीडिया से मिली हैं।
जय सतनाम। जय गुरुदेव।
- डॉ. अनिल भतपहरी
चित्र: 1962 का मूल पाम्पलेट (नीलेश अनंत जी के वाल से साभार)
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