Sunday, June 28, 2026

शउर ( ग़ज़ल)

शउर तक नहीं जिन्हें प्याली उठाने के 
कैसे कैसे लोग चले आते हैं मयखाने में 

खा रहे बेतरतीब पर वे क्यों अघाते नहीं 
कोई नायाब नुस्खा मददगार हैं पचाने में 

मत जाओं वहां न कद्र और शोर हैं बहुत 
चुप अजनबी सा मौज किसी के जनाज़े में 

हर बार हसरतें जग उठती हैं बारिश में 
पर क्या बेबसी जमीं की बंजर है उगाने में 

शलिकादारो से न करो उम्मीद कुछ होगा नहीं 
चले बेशउर तलाशे अब नई मज़ा अफ़साने में

सरई बोड़ा

सरई बोड़ा की साग 

बोड़ा, ईमली कढ़ी, मडिया (रागी)चीला, स्ट्रीम रईस भात और कई दशकों से एक ही ब्रांड जबलपुर का लिज्जत पापड़ ।

पहली बार आज रात्रि भोजन में औषधीय गुणकारी एवं अनुपम स्वाद का मणिकांचन युति.. बोड़ा की साग खाकर सच में मज़ा आ गया।
   तभी तो बोड़ा बस्तर के हाट बाजार में ही हज़ार बारह सौ किलो बिक रहे हैं।

   वैसे अपने सुधि पाठकों को अवगत करा दूं 1996 में ही पेंड्रारोड के बाज़ार में बोड़ा 20 रु कूढ़ा (लगभग 200 Gram)  में सबसे महंगी और अनोखी सब्ज़ी का गुणगान कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापको से सुनकर मंगली बाजार से खरीद कर घर लाया ।परन्तु नई नवेली सुवारी ने जब धोकर काटी अंदर से कालापन और लिरबूट चिपचिपा पन देख बिचक कर फेंक दी। पंडित घर की बेटी विशुद्ध शाकाहारी जो थीं...तब से बोड़ा कभी खरीदे ही नहीं न कहीं खाने मिल पाया।
पर आज 30 वर्षों के बाद उनकी अनुपस्थिति में  बोड़ा का आस्वादन ले ही लिया। हालाँकि इसे न खरीदा न बनाया पर इतना तो हैं कि आसपास आज भी कुछ स्नेही जनों से  भेंट उपहार स्वरुप मिल ही जाते हैं। एक सज्जन ने इसी तरह जोजिया के भीषण गर्मी में मड़िया पेज पिलाकर तृप्त किया।

    बहरहाल अनुपम स्वाद वाली यह बोड़ा सरई पेड़ के नीचे तने के आसपास बादल की गर्जना से मशरुम की तरह उग आते हैं। इस तरह सरई वनांचल में महुए के बाद बहुपयोगी वृक्ष हैं। इनकी पत्ते की दोना पत्तल, सीधी नर्म टहनियों की दातुन , फूल फल खाने एवं अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाने और लकड़ी चौखट दरवाजे से लेकर रेलवे सीलपट से लेकर अनेक तरह की उपयोगी हैं।
   सतनाम संस्कृति में सरई अत्यंत पवित्र वृक्ष हैं इनके जैतखाम बनाएं जाते हैं इसलिए सरई पेड़ श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक हैं। श्रद्धालु पेड़ को देखकर प्रणाम करके ही आगे गंतव्य की ओर प्रयाण करते हैं।

Saturday, June 6, 2026

डॉ अनिल कुमार भतपहरी

नाम : डॉ.अनिल कुमार भतपहरी 
माता : श्रीमती केराबाई भतपहरी
पिता: स्व. सुकाल दास  भतपहरी 
शिक्षा : एम ए पीएचडी पी. जी. डी. टी. सुगम संगीत 
संप्रति: प्राध्यापक हिंदी 
वर्तमान पद : उप संचालक उच्च शिक्षा विभाग संचालनालाय इंद्रावती भवन नवा रायपुर 

श्रेणी : प्रथम
वेतन मैट्रिक लेवल 13 A
वेतन : 205000

अनुभव: 23 वर्षो का आध्यापन
एवं 2003 से 2019 तक सत्रह वर्षो तक रसेयों कार्यक्रम अधिकारी

प्रशासकीय अनुभव : 1.  सहायक संचालक उच्च शिक्षा विभाग 2019-2021 

2. सचिव,छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग  2021- 2024 

3 उप संचालक उच्च शिक्षा विभाग 2024  से अब तक
 
4 राज्य स्तरीय साहित्यकार सम्मेलन आयोजन प्रभारी एवं राजकीय सम्मान के लिए निर्णायक समिति में सदस्य 
5 राजिम कल्प कुंभ 2023 में सत्कार/ मंच प्रभारी
6 इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ का नोडल अधिकारी 
7  राज्योत्सव 2024 एवं 2025 के लिए उच्च शिक्षा संचालनालय प्रभारी ।
प्रकाशित कृति - 1 कब होही बिहान  काव्य संग्रह (सर्व प्रिय प्रकाशन नई दिल्ली ) 2007

2 पावन पिरीत के लहरा कहानी संग्रह वैभव प्रकाशन रायपुर 2015

3 गुरु घासीददास और उनका सतनाम पंथ वैभव प्रकाशन रायपुर, एवं  बुक क्लिनिक बिलासपुर 2019

4 हँसा अकेला सतनाम संकीर्तन   
वैभव प्रकाशन रायपुर 2019

5 ठोस विचारों की कीमगिरी लघु  कथा संग्रह , बुक क्लिनिक 2021 

6 The value of a cup of tea (short stories ) book clinic Bilaspur

7 हड्डी की जीभ नहीं कि न फिसले काव्य संग्रह ,वन एलीगन नई दिल्ली 
8 सुकुवा उवे न मंदरस झरे काव्य संग्रह सत श्री प्रकाशन 


सम्मान - कौमी एकता सम्मान 2008,आरुग फूल सम्मान 2009, काव्य श्री सम्मान 2012,   विशिष्ट कार्यक्रम अधिकारी सम्मान मैसूर 2012 छत्तीसगढ़ राजभाषा सम्मान 2012, राष्ट्र भाषा अलंकरण 2013, 2019, स्वास्थ्य मंत्रालय नई दिल्ली से उत्कृष्ट सेवा सम्मान 2019, अंतर्राष्ट्रीय लघुकथा सम्मान काठमांडू नेपाल 2022 
बिलासा सम्मान 2023, विमल मित्र सम्मान 2023 
विभिन्न सामाजिक / साहित्यिक सस्थानों ने विविध सम्मान. 

पता -  ऊँजियार सदन, सी 11/ 9077 
सेंट जोसफ टाउन अमलीडीह रायपुर छत्तीसगढ़

संपर्क - 9617777514
anilbhatpahari@gmail.com 
Blog - सत सांधन anilblogpost 

YouTube channel : Anil Bhatt CG 

Website - anil.in