Friday, October 19, 2018

संतो की सद्गति

बुद्ध का मृत देह  था उसे जला दिए गये और अस्थियाँ केश आदि संरछित कर लिए गये ताकि ऐसा विलक्षण व्यक्ति होने का साछ्य रहे।शायद यह उनके इच्छानुसार ही हुआ। वे निब्बान पाए  ... अनगिनत  स्तुप बने अवशेष रखे और उनकी पूजा अर्चना शुरु हो गये यानि  कि शव साधना मृतक पूजा.....
      कबीर मगहर में प्राण त्यागे पर देह फूल में बदल गये हिन्दू मुस्लिम उन्हे बाट लिए ....  और अनगिनत मठ बने यहां भी समाधि व मठ में चादर पोशी होने लगे शव व मृतक पूजा जारी ही हैं ...
      गुरुघासीदास १८५० के बाद नहीं दिखे वे कहा गये कि मृत्यु हुए कि किसी जानवर या सडयंत्र  आदि का शिकार अब भी अग्येय हैं। केवल जनश्रुति है कि वे बंगोली में एक और सहिनाव घासीदास के साथ समाधि लिए ...
लोग इसे सच नहीं मानते
  कुछ लोग कहते हैं कि बलौदाबाजार लवन के बीच वे दिखे .... उसे तलाशने / मनाने महानदी तट   तक परिजन गये ..पर नहीं मिला ... क्या वह नदी में प्रवाहित हो गये या किसी तरह वहां से निकल अपने प्रिय  जन्म स्थल गिरौदपुरी गये कि साधना स्थल छाता पहाड़ जनश्रुति है कि वे वहां जाकर ही ध्यान करते शरीर त्यागे जिसे कोई न देख पाए इसे ही अछप या अन्तर्ध्यान जैसे अलंकृत शब्द से जनमानस व्यवहृत किए। छाता पहाड की उस कंदरा को सतलोकी गुफा कहते हैं। और संयोगवश वह तीन भागो में विभक्त हैं। बीच में जैतखाम स्थापित हैं। लाखो सर वहां श्रद्धा से झुकते हैं।
     पर उनके देह  न मिलने पर कोई अन्तेष्टी क्रिया नहीं हुए ।अन्यथा एक  समर्थ राजा बालकदास अपने पिता के कुछ न कुछ अन्तेष्टी करते ...  और लाखो श्रद्धालु जरुर उनमे जुटते पर ऐसा नही हुआ।
    उनकी प्रयुक्त सामाग्री खडाउ सोटा कंठी जरुर उनकी पुत्री  संरछित  किए हैं( आज वही उनके अप्रतिम साछ्य है जो मारकंडे साहब आपके गाव डुम्हा के दीवान परिवार के पास  सुरछित है।) वह पुरानी होन्गे और जो धारण किए रहे हो वह न मिला या हो सकता हैं। वह वही हो( भले  देह न मिला  )और उनकी ही प्रतिकार्थ श्रद्धा वश  पूजा होते हैं। क्योकि गुरुघासीदास असधारण थे उन्हे साधारण करने कोई अशोभनीय बाते नहीं की जा सकती ।न करना चाहिए ...
      यानि की तीन महापुरुषो की अंत और उनके अवशेष से यह समझा जाय कि जो विलछण व असाधारण होते हैं। उनके संदर्भ में विशिष्ट क्रिया या  अलंकृत वृतान्त बनते ही हैं।

    ।।सतनाम ।।
डा. अनिल भतपहरी
  9617777514

Wednesday, October 17, 2018

सतनाम‌ एक गुरुमुखी परंपरा

आदिधर्म सतनाम श्रमण संस्कृति का अभिन्न श्रुति परंपरा  हैं। इनमें वक्ता "गुरु" और श्रोता शिष्य या अनुयाई हैं। यह गुरु चेला के मध्य वार्तालाप परीक्षण प्रसंस्करण द्वारा जनमानस में अजस्त्र प्रवाहमान हैं। इसलिए यहा गुरुमुखी संस्कृति का दिग्दर्शन होते हैं-

गुरुमुख गुरुमुख पार उतरगे नेगुरा ह गये भुंजाय
          जैसे साखी से यह प्रमाणित होते हैं। साधना सिद्धि कर कोई भी प्रग्यावान  सतनाम के स्वरुप को जान समझकर  गुरुत्व भार गुरुपद धारण करते है। तथा अपनी वाणी ध्यान स्पर्श व आशीर्वाद से शिष्य के अन्तर्मन को प्रकाशमान करता है। उनके अंदर की आत्महीनता तमस आलस्य प्रमाद को हटाकर उन्हे ओजस्वी तेजस्वी और विवेकी बनाते हैं।
        ऐसे ही समर्थवान शिष्य ही गुरु के निर्देशानुसार जनकल्याण के निमित्त अनेक रचनात्मक कार्य में प्रवृत्त होते हैं।
            मन वचन कर्म से यदि कोई व्यक्ति इन मह्ती कार्य को करे तो वह निर्मल यश के प्रतिभागी होकर जीते जी  परमपद व सतलोक प्राप्त करता हैं।
           यह सतनाम संस्कृति बौद्ध धम्म ,खालसा पंथ ,कबीर पंथ ,साध पंथ ,सतनामी पंथ, राधास्वामी  मानव धर्म, प्रेम पंथ,जैसे अनेक मत पंथ सम्प्रदाय में अस्तित्व मान होकर इसी श्रुति परंपरा संगत पंगत अंगत द्वारा वैश्विक विस्तार की ओर अग्रसर है।
             ।।सतनाम ।। 
      संसार सतनाम मय हो
             सतश्रीसतनाम

डा- अनिल भतपहरी
चित्र - सतनाम धाम नारनौल दोशी पहाड़ समीप नई दिल्ली  भारत

सतनाम संस्कृति की केन्द्रस्थली महानदी धाटी

"सतनाम संस्कृति का उद्गमभूमि "
महानदी एंव जोक नदी धाटी सभ्यता में बौद्ध धम्म का प्राचीन अवशेष सर्वत्र विद्यमान है।इसी स्थल से महायान शाखा का सूत्रपात भी हुआ। सम्राट इंद्रभूति सरहपाद आनंद प्रभु नागार्जुन सदृश्य महान व्यक्तित्व की जन्मभूमि रहा है।उनके प्रभाव जनमानस और इस परिछेत्र की भाषा बोली और संस्कृति पर पड़ा ।
ट्रान्समहानदी का यह छेत्र अपनी नैसर्गिक सौन्दर्य और सधन वन प्रांतर के  के कारण  साधको अन्वेषकों के लिए सदा आकर्षण का केन्द्र रहा। इसी परिछेत्र सतपथ संस्कृति का भी उद्गम हुआ।सत्यवंत प्रजाति जो श्वेत ध्वजवाहक रहे का कर्मभूमि रहा।शैव शाक्त वैष्णव बौद्ध नाथ सिद्ध साधुओं साध्वियों  का यह साधना स्थली तुरतुरिया सिद्धखोल साधुगढ सिंहगढ सिहांसन पाट गिरौदपुरी कुर्रुपाट सोनाखान नारायणपुर सिरपुर बम्हनी‌    जैसे जगहों मे इनके केन्द्र है। पलाशनी‌‌ को जोकनदीऔर
अब सतनाम संस्कृति मे "योगनदी" कही जाने लगी है।
    तपोभूमि गिरौदपुरी इनके तट पर विराजित है जहां सुरम्य व नैसर्गिक सौन्दर्य का सृजन करती है।सोनाखान और गिरौदपुरी के मध्य बीच नदी मेंं हाथी की आकृति वाली शिलाखंड को श्रद्धालू सोनाखान राजा रामराय द्वारा गुरुघासीदास को मरवाने मद पिलाकर भेजे गये मानते है जो बाबा जी के तपबल से शिलाखंड मे परिवर्तित हो गये ।
  बाहरहाल इस किवदंती से यह तो पता चलता है कि तत्कालीन समय में गुरु बाबा के नव प्रवर्तन जो‌ व्यक्ति स्वतंत्रता व  समानता पर आधारित रहे  से सुविधाभोगी गण राजा सामंत व पंडे पुजारीआदि  उद्वेलित रहे और उनके सतनाम जागरण के तीव्र विरोध किए। बाबा जी को‌ ग्राम्य देवी कुर्रुपाट मे नरबलि तक दिए गये .... फलस्वरुप वे अपने प्रिय जन्म और साधना स्थल को   छोड़ने विवश हुए ... वे महानदी पार कर गिरौदपुरी से तेलासी भंडार तकरीबन ७०-८० कि मी दूर आकर बसे! महासमुन्द जिला के प्राचीन नगरी सिरपुर ही बाबा जी के ससुराल है।और वहा से ५-१०  कि मी दूर तेलासी भंडार (बीच मे हमारे ग्राम जुनवानी ) स्थित है।सतनाम धर्म के उद्गम और विकास  योगनदी महानदी के कछार में हुआ । और यह तेजी से विस्तारित भी ।
     गुरुघासीदास जी की अमृतवाणी में लरिया का स्पष्ट प्रभाव है। और इसलिए उनके अनुयाई छत्तीसगढ और सीमावर्ती उड़ीसा मे आबाद है।
         महानदी और योगनदी वंदनीय है जिनकी पावन तट पर संसार की" प्रथम जातिविहिन मानव समुदाय" का गठन हुआ। भारतीय नवजागरण का शंखनाद हुआ।
         ।। सतनाम ।।
-डा. अनिल भतपहरी

"सतनाम संस्कृति की केन्द्र स्थली महानदी धाटी "

Sunday, October 14, 2018

विडोस एरिया

""विडोस एरिया "

      विडोस एरिया  ये क्या बला  हवे? असना कोनो  नाम होथय ?  कति अंग या ठ उर ल कहे जाथे ? हमन तो पहिली धांव  सुनत हन रे बबा  ? सुकरितदास  कोतवाल ह घेरी बेरी नोटिस के कागज ल अपन सलुखा के खींसा म धरत त निकालत फरियात कहे लगिस ...  नवा पटवारी  कालेज पढे लिखे फटफटी म आय बोधन मंडल के बेटा धजादास जोन डी.डी . पटवारी के नाव ले अपन हल्का म जाने जाथे ।सियान कोटवार ल समझावत कहिस .... कोटवार बबा  कलेक्टर साहब हर नवा राजधानी के गांव के पारा मन म जिहां ४-५  बछर म मनखे अकाल मौत मरत गिन कोनो  किडनी लिवर कैसर बिमारी कोनो एक्सीडेन्ट तो कोनो जहरीला शराब पीए कोनो चरस अफीस और डरग अरक म सिरायवत गे हे उनके परिवार ल चिन्हाकित करे बर हांका परवात हे ।
कोटवार कहिथे का उन मन ल मुयावजा मिलही का पटवारी साहेब तीर म कोटवार संग खडे समेदास तिखारत पुछे लगिस ।
डी डी पटवारी कहिथे - अइसे हमला न इ लागत हे । फेर सुने म आत हे विधान सभा म प्रश्न पुछे गिस हबे कि राजधानी एरिया के गांव म धड़ाधड़  मौत -फौत  होने लगा है। आपसी बटवारे और पारिवारिक कलह फैलते जा रहे हैं। उसका कारण क्या? उसे रोकने सरकार प्रभावी कदम उठा रहे हैं या नहीं ?  नवतोम्हा विधायक के पुछे ल विधानसभा सन्न हो गे रहिस .... तेही पाय के कलेक्टर साहेब लमसम जानकारी बर मुनादी करात हे .... कि काकर काकर घर फौत होय हवे ओकर  जानकारी पंचायत भवन म आके लिखवाहु और कोटवार रजिस्टर म फौत के आगु कारण लिखवाहु। ऐसे हाका परवा देना । कल साढे १० बजे से ना म  एंट्री होना शुरु करेन्गे ।बने हर चौक में खडा होके हांका पार देना । कहिके  डी डी पटवारी हर  आगु गांव डहन मुनादी कराय चल दिन ......
    ‌   
    गियानिक दास हर भुपेन किराना दुकान  तीर  लीम चौरा म  अपन नाती नतनिन ल नड्डा बिस्कुट खवावत ब इठे रहिस कि डी डी पटवारी संग अभरेट हो ग इस .... साहेब सतनाम बंदगी होइस त पछिस का हालचाल हे मंडल .... त अपन मितनहा मंडल बोधन के बेटा डी डी ल देख बेटा के सुरता आगे ....  बड़ दुःख के गोठ हे पटवारी साहेब  का ला गुठियाबे अउ काकर कना दु: ख ल परियाबे ।बुढ़त काल तीरथ बरत करत समे बिताबोन कहत कुलकत तसीली जाके खेत के रजिस्ट्री म दसकत दे रहेन । जम्मा रुपया ल सरकार हमर बैंक के खाता म डार दे रहिस अउ एक कारड दे रहीस जरुरत पडे म एकर से मशीन म खुसेर ४० हजार तक के एक दिन म रकम निकाल लेबे ।मय खाता अउ अटीएम कारड ल संदुक म बिज्जक मार धरे रहेंव फेर  का करबे तारा टोर के परबुधिया जीराखन टुरा ल कलेचुप निकाल के रोजेज मंद कुकरी जुआ चित्ती अउ अपन बाई बर  आनी बानी के लुगरा सोन चांदी के जेवर अउ हप्ता हप्ता कती माल टाकिज हवे सनीमा देखे जा जा के साल दू साल म फूंक डारिस .....अउ एक रात मंद पीए फटफटी म चढे आत रहिस ये नवा राजधानी के सडंक म चलत  रेती -मुरम भराय   हाइवा म चपका के सतलोक सिधार गय ... हमर त दुनिया उजड गय भले गांव उजाड के सरकार महल सिरजात हवे।   आज नाती नतुरा के पोसई म उमर खपत हे । डोकरी ल असोच लोकवा मार दिन अउ बहुरिया के त उही एक्सीडेन्ट म  एक गोड एक हाथ कटाय खटिया के पुरतीन हे । समधी बिचारा जतनहु कहिके लेगे रहिस फेर उकर बेटा  बहुरिहा कब तक राखतिस .... एक फटिक के चल दिस ।बपुरी खोली म फफकत परे रथे। मोर त बड़ मरना हवे ... का करव कहे नी जाय ...
        
    
        सुने म आत हे अब गांव धर ल उजारे जाही .... कोतवाल के काही हाका पारे ल सुन करेजा मुह आ जथे ... सथरा म ब इठे कौरा न ई उठे  । का होही सतपुरुस साहेब तही जान । कहत बोधन मंडल के तर तर आंसु बोहा जात हे ...

गियानिक अउ बोधन के दोस्तदारी के बड़ किस्सा रहीस ... दुनो अपन अपन गांव के बडंहर रहीस ।अउ उखर  एकलौता संतान रहीस । दुनो म बेटी बेटा होतिस त गुरावट जुड़ जतिस ।फेर बेटा मन के बिहाब एके गांव अउ एके लगन म संगे बरात ले के बहुरिया बिहाव के   संउख रहीस । फेर बड़ भगमानी होथय जेखर संउख अउ साध पुर जाथे । छत्तीसगढ़ी मनसे मन त अभागा होथे ।जेकर बेटी ल बोधन अपन ध्वजादास बर जोगें रहिस ओहर मंद के निशा म तरीया म बुड़ के मरगे .... तहां धजादास के बिहाव टलगे अउ पढे बर रायपुर के कालेज म चल दिस । एती मन मार के उही गांव के संत सरुप तोरन के धाद जात जतुवम बेटी मुंगेसिया के बिहाव उच्छाहित गियानिक मंडल अपन अकलौता बेटा अंजोरदास बर करे रहिस ।फेर अंजोरदास हर काकर भभकौनी म आके अंधियार दास लहुट मंद म उहा म चुर   हाइवा म चपका के असमय परलोक सिधार गय‌ ओकरेच दुनो संतान अउ  अपाहिज पत्नी के नाव सर्वे सूची म लिखवा दिस । चलव कछु आसरा सहारा मिल जाय त जिनगी के गाड़ी अटके हे आरा पुठा छरियाय हे उन सवर जाय अउ फेर चल परय ....

नवा कलेक्टर साहेब बड़ दयालु हवे । सुने म आथे उन मन  हमरे सरीख गरीबहा घर ले निकले हवे ..खोरबाहरा ह लीम चौरा म संझा बइठे  लोगन मन ल बताय लगिस कि  उकर बाप हर तको  तड़िहा अउ जंग मंदहा रहिस ।कोड़ोबोड़ो राज के रहोइय्या ये ।ताड़ नरियर के पाना छवाय कुंदरा म रहय अउ ओखर महतारी बपुरी नरियर बगैचा म बनी भुति करय ..एक दिन नडियल पेड़ म चघे ओकर गोस इय्या नशा के चक्कर म  मुड़ भरसा गिर गय . तीन लरिका के महतारी बपुरी के बिपत झन पुछ क इसे अपन नान लरिका ल पोसिस होही सजोर करिस .... अउ ओखर बड़े बेटा ल नवोदय स्कूल म भर्ती कराइस ....आज उही ह गरीब गुरबां  बर देवता बरोबर इंहा  आके सेवा बजात हवे। अउ अलकर म  होय विधवा महिला मन  ल  रोजी रोजगार देय के उदिम चलावत हे उकर बाल बच्चा मन पढाय बर अवासिय स्कूल खोले जाही ‌।  सरकार सो नवा नवा प्रस्ताव बनवात हे उकर पुनरवास बर जी जान लगे हवे ... सुने म आत हे कि उनमन बिहाव न इ करे ये  अउ कोन्हो विधवाच संग करही ! 
      मनबोधी  उनमन अतेक करत हे त सबो नास  के जर  मंद मंउहा के नसा हे त सरकार नसा  बंदी  काबर नइ करय? समारु कथे सरकार कोन ये अरे तय हम वोट डर इय्या ह त सरकार आय पहली चलो हमी बंद करी ।गांव म मंद बेचाय बर बंद हो जाही । हमर बस चले त म उहा पेड ल कटवा के सगोन सराई ओमेर जगो दे। न रहे बांस न बजे बंसरी ।पुनु कथे ठउका कथस जी । f रमेसर फांकत कहिस का ठउका कहिस.. अरे आजकल गोली के दारु बनथे एक बोतल पानी म दु ठिन डार दे जहां धुरिस ते बनगे मंद । फेर अंगुर, च उर,जवार बाजारा सबो ल सरो के बनात हे।सरकार धान लेवत हे मंडी मन म सोझ्झे बरसात म सरोवत  रखे उही सरहा मन के मंद बनत हे उन्ना के दुन्ना कमात हे । पुरा सरकारी कारज अउ  करमचारी के तनखा मंद के प इसा से पुरोहवत हे ।सरकार कम चतुरा निये ए हाथ म ले ओ हाथ म दे ।
  मंद कभु बंद नी होय ... तीज तिहार देव धामी सबो जगा म ओ बियाप गे हवे ।जंगलिहा मन ल २-३ बोतल म उहा मंद  राखे के सरकारी परमिशन हे ।
     आजकल तो सरकारे बेचत हे दवा नइये राशन माटी तेल न इ हे फेर डराम के डराम मंद ह गांव- गांव म गंगा बोहात हे बोरिंग कस पानी ।
       हव जी आजकल बोरिंग अउ खरंजा का बनिन गांव मन नरक लहुटगिन अब घर घर शौचालय बनवा के ये नरक ल रौरव नरक बनवाय के उदिम करे जात हे।पंडित बबा हर सरकारी योजना अउ ओकर आधा अधुरा पन ल देख अगिया बैताल होत कहत रहिथे ।ओखर बात सिरतोन आय ।या तो जैसे हे चलन दे अउ जब नवा नवा करना हे त पुरा करो ये नहीं कि अन्ते तन्ते आधा अधुरा करके बनाय के चक्कर जोन हवे तहु ल बिगाड़ देय जाय।
   शौचालय के दुर्गंध ले गांव के गली चौरा म ब इठे न ई जा सकय ।मार नाक न इ ठहरे । बिना नाली निकास नलजल के येहर बास अउ बैमारी के घर बनत जात हे ।
       रिपोर्ट के सौपते विधान सभा म प्रस्ताव पास होइस कि नशा अउ  दुर्घटना के शिकार लोगन के विधवाओ और उनके बच्चों के संरछण बर सरकार "विधवापुनर्वास योजना "नवा र इपुर म लागु करे गे हवे ।जेमा इच्छानुसार बिहाव करके घर बसाय के प्रावधान तको हवे।
         बिहाव वाले बात म बड हो हल्ला होय लगिस ....फेर सासाबेगी अइसन थोरेच होही ? छाती वाला चाही एकर उबार करे बर ।फेर कोनो कोनो भागमानी अउ धर्मी चोला होइ जथे ।एसो सरकारी सामुहिक बिहाव म पाच जोडा विधवा विवाह होइस । त कत्कोन झन के आस के पंछी सरग म उड़े धरलिस .....स्व सहायता महिला समुह सहित नारी सशक्तिकरण के योजना बने लगिस.....सरकारी सहायता से अ इलाय नार उल्होय लगिस
    अइ से लगत हे कि विडोस एरिया के दिन अब बहुरही ....
        डा अनिल भतपहरी
       सत श्री सेन्ट जोसेफ टाऊन अमलीडी

मया के ३ गीत

१ "मया के गीत "
निरमोहना रे मया के मरम नई जाने
गेहस तंय भगवान खोजे बर बनके बैरागी
मया म भगवान बसते कथे मया कर संगवारी ....
   निरमोहना रे ....

२. "मया के गीत "

     निरदइय्या निरमोहना मन के हिरदे म मया जगाबोन
      मया बताबोन मया सिखाबोन गीत मया के गाबोन
        अइसन मन लेहेन ठान ....

३ "मया के गीत"

मया के महिमा अगम बड़ भारी 
  जउन करही तउने येकर जस गाही
    आनिबानी के कथा सिरजाही...
       जुग बितही फेर मया रही जाही

      आज ये गुरुप म ३ मयारुक  गीत" के मुखड़ा प्रस्तुत हे
        डा अनिल भतपहरी

Thursday, October 11, 2018

राजा गुरु बालकदास

गुरुघासीदास के सुपुत्र एंव सतनाम सेना के संस्थापक राजा गुरुबालकदास के शहादत दिवस(  २८ मार्च १८६०  )पर विनम्र काव्यांजलि‌......सत सत नमन

"राजा गुरु बालकदास"

धन्य गुरु बालक दास
गुरुवंश म जनम धर आये तय...

बन के बधवा बेटा बबा के
सपना ल संवारे तय ......

बनके  सतनामी राजा  
गुरु राजपाठ ल चलाये तय...

रावटी लगा के दुनिया म
सतनाम पंथ ल चलाये तय....

गाव गाव अठगवा बनाके
सतनाम अखाडा ल चलाये तय

भंडार धाम म अचरुज
मोती महल सिरजाये तय...

चाद सुरुज जोडा खाम गडाये
सतनाम- से‌ना साजे तय ....

दुख पीरा हरके मनखे मन के
मान ल बढाये तय ....

सत‌नाम के सेती बबा
अपन जान ल गवाये तय...

जुग जुग नाम अम्मर होगे
बीर बलिदानी कहाये तय...

डा.अनिल भतपहरी
९६१७७७७५१४
( गाव जुनवानी ,भंडार-तेलासी)

सी-११ ऊंजियार- सदन ,सेन्ट
जोसेफ टाउन, अमलीडीह रायपुर।