Sunday, September 13, 2026

हमर फटफटी राजदूत


शीर्षक: हमर फटफटी (1984) : परिक्षेत्र की पहली मोटर साइकिल और एक धरोहर की कथा

लेखक: डॉ. अनिल भतपहरी

1984 की बात है। मतलब मैं तब से राइडर था। संलग्न फोटो में पीछे बैठा बच्चा मैं ही हूं — यह फोटो राजू भाई (कोसले चाचा, बीईओ के बेटे) ने उपलब्ध कराया है।

इसे 1984 में पिताश्री सुकाल दास भतपहरी (प्र. प्राचार्य, शास. हाई स्कूल कोसरंगी) और मिलन बंजारे चाचा (सेवानिवृत्त प्रबंधक, लघु उद्योग निगम, भोपाल) ने रायपुर से 7500 रुपये में खरीदा था। 100 रुपये में फूल टैंक करवाए गए और 100 रुपये की टोकनी भर फल, मिठाई, फूल-माला लाए गए थे।

मां से अनबन होकर 8 हजार फूंक दिए गए, जबकि हमारे बंधियाँ चक से लगा 10 हजार में एक सवा एकड़ का खेत चुकता में खरीदने का प्लान कर चुके थे। जिसने खरीदा, उनके चलते आज तक हमारी "चकबंदी" नहीं हो पाई। उसका मलाल माताश्री-पिताश्री को होता रहा।

परंतु परिक्षेत्र की पहली मोटर साइकिल की ध्वनि जब गूंजती, तो खेत में काम कर रहे लोग दूर तक टकटकी लगाकर देखते। हम बच्चों का एक अलग ही मजा और शान होता था।

बारिश के दिनों में पहुंच-विहीन टापू बनते गांव से नहर रास्ते जाने के लिए यही हमारी इमरजेंसी एम्बुलेंस थी। पिताजी और मैंने अनेक लोगों को कन्नौजिया डॉक्टर, खरोरा वैद्य, डॉक्टर खरतोरा, संडी ले जाकर बचाया है।

यह राजदूत अंत तक रहा। पिताश्री के जाने (2000) के बाद भी उन्हें संभाल कर धरोहर की तरह रखा गया था। भले खेती करना छोड़ दिया और धीरे-धीरे सभी भाई-बहन शहरों में बस गए, वह यूं घर के बरामदे में एक गार्जन की तरह रखवाली करते रहे। जब-जब जाते, प्रणाम करते थे।

कुछ वर्ष पूर्व सुनील ने उसे मिट्टी तेल में चलने लायक बनवाया, और अंततः जो हमारे खदान मुंशी चलाते थे, उन्हीं के हो गए।

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