#anilbhatpahari
छत्तीसगढ़ी साहित्यकार सम्मेलन म गुनान गोष्ठी
राज मिले २५ बछर होगे बड़ उछाह हे !
फेर इहां के भाषा,कला संस्कृति
अउ अस्मिता के संगे संग
जल जंगल जमीन ख़िरात हे!
छत्तीसगढ़ी गीत संगीत सनीमा संग
पठन पाठन लेखन म छत्तीसगढ़ नदात हे!
ये संसो कि खरही लेसत अउ कोठी के धान हेर
हमरे छानी म होरा भुजंत हमीं ल बिलेर मिझेर
अतेक मान देवन कि उन ल डरान
चिटकोन नइये कोनो ल काही भान
का संत भूमि के रहैया संते कस संतई करत रही जाबोन
तियाग तपस्या करतेच रहिबोन कि कभू राजपाट पाबोंन
मंद माखुर के निशा पानी,देव धामी के पूजई आनी बानी
यहीच मोकाय बोकाय जम्मो जिनीस ल लुटाय नंगाय
का मुड़ी धर गुनत रहि जाबोन सरी जिनगी ल पहाबोन
कइसे कही कछु कहत नइअस ग सियान
चीटिक मने मन भंजा ले कब होही बिहान
डॉ. अनिल भतपहरी/ 9617777514
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