एक सौ दस वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ की सामाजिक/ राजनैतिक चेतना
सतनामियों का गौरक्षा आंदोलन सर्वप्रथम 1915 में राजमहंत नयन दास महिलाँग और गुरु गोसाई अगमदास साहेब के नेतृत्व में आरम्भ हुआ. यह आंदोलन इतना उग्र और प्रखर था कि जिस सत्ता की सूर्य नहीं डूबती उस ब्रिटिश हुकूमत की चूले हिल गई.उनकी दो बड़े बुचड़ खाने करमन डीह और ढाबाडीह बंद हो गये जहाँ से सेना के लिए मांस और चमड़े की आपूर्ति होती थी. कृषको के लाखों पशुधन कटने से बच गये.
आंदोलन और उनकी सफलता से देश भर में खलभली मच गई. कलांतर मे तीन बातें घटी-
1 हिन्दू महासभा वालों ने सतनामियों का सम्मान किया और हिन्दू सतनामी महासभा का गठन कर सतनामियों का हिन्दुकरण करने की दिशा मे अनेक कार्यक्रम आरम्भ हो गए.
2. महात्मा गाँधी का सतनामियों के बीच आगमन और स्वतंत्रता आंदोलन के साथ कांग्रेस से जुड़ाव.
3.1924 में डॉ अम्बेडकर का इंग्लैंड से वापसी और उनका सामाजिक क्रन्तिकारी कार्य और उनके प्रतीकार हेतु 1925 में आर एस एस का अभ्युदय इतिहास का महत्वपूर्ण घटना हैं.
110वर्ष के इस काल खंड पर विचार विमर्श होनी चाहिए.
डॉ. अनिल भतपहरी / 9617777514
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