Tuesday, October 21, 2025

दीपावली

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दीपावली की हार्दिक बधाई 

दीपावली का आशय अनेक दीपों की पंक्तियां हैं जिसे कतारबद्ध रखा गया हो।  ऐतिहासिक तथ्य यह है कि सम्राट अशोक अपने अधिकार वाले इस महादेश जिसकी सीमाएं सुदूर कंधार (गंधार)कजाकिस्तान से लेकर श्याम देश बाली सुमात्रा तक नेपाल से सिंहल द्वीप श्रीलंका तक 84 हजार बौद्ध स्तूप बनवाए और एक ही तिथि कार्तिक अमावस्या को इन स्तूपों में दीप प्रज्वलित करवाकर उद्घाटन कराए। 
  रामायण महाकाव्य के अनुसार भगवान राम वनवास से अयोध्या लौटे उनकी स्वागत में लोग अपने घरों में दीप जलाएं। 
पौराणिक वृतांत के अनुसार समुद्र मंथन में धनवंतरी और लक्ष्मी प्रगट हुई उनके स्वागत में दीप जलाएं।
      छत्तीसगढ़ में कृषि संस्कृति का यह पावन पर्व हैं फसलों  के खासकर धान का घर, कोठी,खलिहान में आने उनके स्वागत में ग्राम देवताओं में दीप जलाने, रात्रि को पशु पालक भैंस के कोठे में सुअर, गाय के कोठे में मुर्गा कबूतर आदि के बलि चढ़ाने, मांस मदिरा पान कर सामूहिक नृत्य गान करते खुशियां मनाने का प्राकृतिक पर्व हैं ।
 रात्रि में गौरा गौरी विवाह उत्सव का भी आयोजन बड़ी धूमधाम से किए जाते हैं। इसके लिए सुवा नृत्य कर पंद्रह दिनों तक महिलाएं तैयारी करती हैं।प्रातः विसर्जन कर सुख संपदा की कामना की जाती हैं।

जब से मानव समाज में कृषि संस्कृति विकसित हुईं गांव बनाकर एक जगह बसाहट हुई  तब से यह प्रथा प्रचलन हैं। कालांतर में इस दिन लोग अपनी अपनी धर्म मत की कथा कहानियों को जोड़ दिए गए। फिर मूल बातें विस्तृत कर कथाओं को ही सच मानने लगे।

१सुरहुत्ती / देवारी= ग्राम देवताओं में दीप चढ़ना/ बलि देना 
 २गोवर्धन  पशुओ को खिचड़ी खिलाने कोठी में टीका देना धन की बढ़वार की कामना का पर्व।

३ मातर भूदेवी की पूजा लोग सामूहिक नृत्य गान करते गौठान में एकत्र होते हैं और खेल शौर्य का प्रदर्शन करते हैं। मातृका पूजन का अवशेष सिंधु घाटी सभ्यता में भी मिलती है।
यह लोक पर्व हैं न कि शास्त्रीय पर्व।
व्यापारियों/ धार्मिकों/ ने इसे अपने अपने ढंग से व्याख्यायित कर इस लोक पर्व को अपना लिए हैं और उसी तरह प्रचार प्रसार करते हैं।
मुगलों ने बारूद से तोप पटाखे फोड़े कर परीक्षण किए आवाज से हर्ष प्रगट किए , बिजली आई तो रौशनी करने बल्बों की झालर बने। 
। पुष्य नक्षत्र में सोने चांदी  खरीदी हेतु शुभ मुहूर्त घोषित किए गए। बर्तन लेने धन तेरस गढ़े गए इस तरह अनेक चीजें जुड़ती गई। इस तरह यह दीपोत्सव देश का  महापर्व हो गया।
  
सबके अंत: करण में परिव्याप्त अज्ञान अभाव रुपी कष्ट कलुष कटे, सर्वत्र उजियारा फैले। मंगलकामनाएं ।

डॉ .अनिल भतपहरी/9617777514

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