#anilbhattcg
स्वतंत्रता
समझ न आने वाली बातें
करना ही बौद्धिकता है
जहाँ जरुरत हो बोलने की
वहाँ चुप रहना नैतिकता है
पुरातन परम्पराओं का
उत्सव मनाना धार्मिकता है
बर्बर आदिम प्रथाओं को
विरासत समझ भाव गर्विता हैं
यथास्थिति कायम रहें
यही प्राथमिकता है
कोई हलचल न हो
बस इसकी आवश्यकता हैं
नवाचार का प्रतिरोध
यहाँ की आधुनिकता है
इन सब पर हस्तक्षेप
न करना सज्जनता है
मित्रों ऐसा जीवन निर्वहन
करना ही क्या स्वतंत्रता हैं ?
-डॉ.अनिल भतपहरी
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