तीजन
पंडवानी की पर्याय हो चुकी पद्म विभूषण तीजन बाई की लंबी बीमारी के बाद दुःखद निधन से कला जगत सहित प्रदेश में शोक व्याप्त हैं। निरक्षर होते हुए भी वो महाभारत एवं श्रीमद्भागवत की गूढ़तम बातें ऐसे प्रस्तुत करती कि श्रोताओं के मानस पटल पर उनकी बातें सदैव अंकित हो जाती थी।
गुरु घासीदास छात्रावास आमापारा रायपुर में रहते छात्र जीवन में पहली बार मैं 1988 -89 में उनकी पंडवानी विवेकानंद आश्रम रायपुर में श्रवण किया ।तब आत्मानंद जी थे और उनसे छिटपुट संवाद भी होते रहें हैं । तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा जी के आगमन पूर्व उनकी "राजा जनमेजय नाग यज्ञ पर्व " प्रस्तुति सुना और उनकी अप्रतिम भावाभिव्यक्ति देख चकित हुआ। क्योंकि मैं पिता श्री के नवरंग नाट्य कला मंच से निकला अभिनय की बारीकियां को छुटपुट जनता समझता भी था और शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों के दर्शक और यदा कदा प्रतिभागी भी हुआ करता था।
उनकी दूसरी प्रस्तुति लंबे अंतराल बाद छत्तीसगढ़ राज्य के अभ्युदय के बाद प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी के शपथ ग्रहण समारोह पुलिस ग्राउंड रायपुर में देखा ।तब सहायक प्राध्यापक हुए 4 वर्ष हो चुका था और कई छात्रों/ कलावंत लोगों को ऑटोबायोग्राफी देने का सौभाग्य मिलना शुरू भी हो गया था। (पिताश्री सुकाल दास भतपहरी शिक्षक कलावंत रायपुर रिसर्च सेंटर हॉस्पिटल में हार्निया आपरेशन उपरांत भर्ती था। वे ही समारोह स्थल जाकर इतिहास बनते देखने और साक्षी होने का आशीष दिए थे।हालांकि उन्हें लाख उपाय के बाद बचा नहीं सके और महीने भर बाद दिल्ली एम्स में 4 दिसंबर 2000 को सतलोक प्रयाण कर गये। ) पहली ऑटोग्राफ मैने अपने पॉकेट डायरी जो अक्सर रखकर चलता था ,के एक पेज पर तीजन बाई का ऑटोबायोग्राफ लिया। कत्थक देखा और वापस अस्पताल आकर पिता श्री को उनकी ऑटोग्राफ दिखाया। वे प्रदेश बनते और एक कला साधिका की हस्ताक्षर देख हर्षित हुए।
तीजन साक्षरता अभियान से जुड़ी अक्षर समझी,हस्ताक्षर करना सीखी। विरासत से प्राप्त ज्ञान नैसर्गिक प्रतिभा से वे विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट मानद उपाधि पाई और लोग उनपर पी-एच.डी. भी की। आगे भी करेंगे।
निःसंदेह तीजन कापालिक शाखा की महारानी थी और उनकी असाधारण उपलब्धियां कला साधकों के लिए प्रेरक और प्रदेश के गौरव हैं। वे छिन (पाम पौधे की पत्ती)की बाहरी (झाड़ू )बेचकर आजीविका कमाती अपनी कला साधना से "फर्श से अर्श की ऊँचाई" स्पर्श की। उनकी अदम्य संघर्ष, साधना, प्रस्तुति एवं उपलब्धि सदैव प्रेरक रहेंगे।
विन्रम श्रद्धांजलि शत शत नमन...
डॉ.अनिल भतपहरी 9617777514
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