जो तजे जीर्ण शीर्ण पुरातन
वो सतनाम सनातन हैं.
युगों युगों से शोषित मानव
आकर तृप्त हुए पावन हैं ...
पाखंड नहीं कर्मकांड नहीं
सद्व्यवहार पूजा अर्चन हैं..
ऊंच नीच जात पात नहीं
न जन्मना वर्ण विभाजन हैं
भूखे को भोजन प्यासे को पानी
समता और न्याय ही दर्शन हैं...
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