Saturday, April 11, 2026

😘🎇

दीवार 

विचार वि हीन समुदाय में रहना 
जैसे काल कोठरी की दीवारों से घिरना 
आबोहवा ही नहीं चंद रौशनी के लिए  
इधर उधर भटक ना चीखना  
नागवार ही नहींml अपराध हैं तुम्हारा 
मानवता के लिए अलख जगाना 
नुकीली दीवारों से सर टकराना 
अंततः लहूलुहान सkलीब सा जीवन को ढोना 
कोई तो हैं जो हांक ले जा रहा हैं भेड़ें 
पर कहां  दोनों को पता 

..,नहीं पता 
पर कोई तो गया हैं वहां
 कोई देखें हैं जहां 
यह केवल सुने या बुझे हैं लाल बुझक्कड़ सा 
इतने में देखो भला जली रस्सी अकड़ सा 
विचार विहीन जड़वत समुदाय ही समाज हैं 
यदि इन्हीं पैरावटो, मिट्टी गिट्टी की ढेरों पर नाज हैं 
जिसमें हलचल नहीं वे न समुदाय है न समाज हैं
वह हैं काल कोठरी की स्याह दीवार  
चलिए संग पग दो पग लगाने खिड़की किवार
या फिर चलें मित्रों ढहाने वो दीवार...

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