Tuesday, March 3, 2026

उनका धर्म राजनीति हैं

#anilbhattcg 

उनका धर्म राजनीति हैं 

जन्म जंगल में 
कर्म जंगल में 
पुरखों की तह  
मिलेंगे जंगल में 
काट कर भरुहा 
बसाएं गांव बस्ती 
आबाद रहें हरदम 
नृत्य गान मस्ती 
पर किसने कराया 
भेद अपना पराया 
वर्ण जात पात खेल 
छल छद्म पेल ढकेल 
छोड़ गांव बसे नगर 
चालक धूर्त नट नागर 
कहे ग्रामीण देहाती 
हमारे उद्यम उत्पाद 
हेर फेर कर बने उस्ताद 
संचय कर धन आपार 
राज सत्ता का कारोबार 
जनसेवा हुआ व्यापार 
बढ़ते रहे सदैव करारोपण 
अब न होगा प्रकृति संरक्षण 
बचाकर जंगल करेंगे क्या 
ये जंगली अभाव से मरेंगे क्या 
करना हैं विकास उजड़ेंगे जंगल 
तभी तो होगा वहां नित्य मंगल
सीधे साधे भोले भाले 
प्रकृति पुत्र जंगल रखवाले 
टंगीये के बेठ बनकर 
बनते उजाड़ने वाले 
पर चलाने वाले कौन 
परस्पर लड़ाने वाले कौन 
बहुरूपिया बहुत पहुंचे हुए 
मीठी बानी शहद से पागे हुए 
हर तरफ वाग्जाल फैलाएं हुए 
अरे वनवासी धरती आबा
भुइयां के भगवान तय किसान 
गुड़ी कुटी मंदिर, तेरा ही काशी काबा 
फूल कर कुप्पा गर्व से अज्ञानी 
अरे अवघट अरे महादानी 
पड़े रहो शव सा बिन शक्ति के 
बिखरे हुए कलयुगे बिन संघ शक्ति के 
डूबे रहों तुम मदिरा सी धर्म भक्ति हैं 
भ्रम में रहो तुम कि इसी में मुक्ति हैं.
पता हैं उन्हें उनका धर्म ही राजनीति हैं 
तुम भ्रम में रहो क्या धर्म रीति नीति हैं 

-डॉ.अनिल भतपहरी/9617777514

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