अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का नाम रिकॉर्ड में दर्ज नहीं
कितने ही अनगिनत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का नाम शासकीय दस्तावेज दर्ज नहीं , या लोगों को पता नहीं. उस समय के अनेक मुजरिम जो जेल गए उसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उनके परिजन घोषित कर नाम जुड़वा कर लाभ ले रहे हैं। बकायदा जनप्रतिनिधि बन गए। दुर्भाग्य तो हैं कि अंग्रेजों के सेवादारों, जासूसो, मुखबिरों और उनके कृपा पात्र रायबहादुरों, सरो, ताल्लुकादारों जमींदारों और राजाओं का राज चल रहा हैं। समाज में आज भी लोकतंत्र और आजादी का आना शेष हैं।
बाहरहाल हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दादा सतलोकी नंदू नारायण भतपहरी, सतलोकी प्यारे लाल टंडन, जुनवानी देवगांव एवं जरवे निवासी स्व पटेल जी, सतलोकी नाना कोंदा प्रसाद बघेल कोसरंगी खरोरा प्रथम अध्यक्ष सतनाम महासभा प क 65 के संस्मरण पर आधारित मेरी वर्षों पूर्व प्रकाशित कहानी 'सुम्मत के सुकुवा' हैं।
उक्त , कहानी छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित कहानी संग्रह "पावन पिरीत के लहरा" 2015 में संगृहीत हैं।
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