।।भाषाई श्रेणी क ख ग के चिखला म चभके छत्तीसगढ़ी।
एक नवंबर ईस्वी सन 2000 में देश के 26 वें राज्य के रुप में छत्तीसगढ़ बनिस। हिंदी भाषी राज्य मध्यप्रदेश ले छत्तीसगढ़ी भाषा के विस्तार क्षेत्र ल भाषाई अउ सांस्कृतिक आधार पर चिन्हांकित करके छत्तीसगढ़ राज अलग होइस। हालांकि बालाघाट, अमरकंटक अनूपपुर के कुछेक एरिया तकों आतिस।फेर जतेक आइस ओहर अनेक विशेषता से परिपूर्ण हवय। ते पाय के छत्तीसगढ़ हर झटकुन देश भर अपन पहचान बनालिस.
अब तो छत्तीसगढ़ महतारी हर 25 बछर के होगिस जइसन ये उमर मे बेटी माई मन के सुघरई बाढ़ जाथे उही रकम के हमर छत्तीसगढ़ के सुघरई अउ महमई चारों खुट बगरत हवय.
ते पाय के सबो डहन ले इहा लोगन के आय जाय के रेम लगे हवय. स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, रेल कल कारखाना सहित उद्योग बाईपार के बढ़वार होवत हवे. फेर कोजनी इंहा के मनखे मन कमाए- खाय बर परदेस जवई छूटत नइहे. देवारी मान खलक उजरे कस गांव के गली सुना पर जाथे। इंहचे येमन बर कोन्हो बुता_ काम काबर नइहे? खांती कुदारी ,रापा गैती के सिवाय कोनो दूसर कराज नइहे का? जब ले जेसीबी, हाइवा ,हाइड्रा आये अब झउहा रापा कुदारी मन नंदा गय. बनिहार मन अब बनी नई मिलय ते पाय के ठल्हा बैठे चौरा मे बीड़ी गांजा मंद माखूर खात -पियत,लड़त- झगरत,थाना -पुलुस,कोरट- कचहरी मे मुंशी,वकील कना लुटात दिख थे.सालपुट खेत बेचत किसान बनिहार होगे.
गाँव मन मे तो अंधियारी छाय हे ,भले शहर पहर मन दगदगात हे.गवई के कुछेक पढ़े लिखें नौकरी चाकरी,हुनर वाला हे ओमन तकों शहर धरे हे अउ अपन सुग्घर रोजी रोजगार मे मगन हवे. फेर कतको झन मन गरु जांगर धरे गरुआत बैठे हे उनकर मन बर कोनो उद्योग बाईपार रोजी रोटी के बेवस्था नइहे तेन हर बड़ संसो अउ गुनान गोठ आय. इनकर बिन सजोर उपाय करें छत्तीसगढ़ के उद्धार नइहे.
इहि तरा इहाँ के राजभाषा अउ दाई भाखा छत्तीसगढ़ी के तको कोनो पुछन्ता नइहे. अतेक बड़ राज अउ दू करोड़ मनखे के बोले बतियाये समझे के भाषा मे कोनो दैनिक समाचार पत्र नइहे. टीवी चैनल नईए न खोल चला सके कोनो मूल छत्तीसगढ़िया के हैसियत हवे। स्कूल कॉलेज मे न पढ़ाई चलत हे ,न मास्टर गुरुजी के भर्ती हे. तब भाषा हर कबतक बाचे रही. गांव गवई ल छोड़ दे शहर मे बसे छत्तीसगढ़िया परिवार मे अब छत्तीसगढ़ी नंदा गे हवय. अउ यही हाल रही त छत्तीसगढ़ी हर झटकुन गाँव - गवई ले तको नंदा जाही. ये हर बड़ दुःख के बात हवय. तेहि पाय के पर प्रांतिक मूल के गैर छत्तीसगढ़ी भाषी छत्तीसगढ़िया मन जेन सियानी करत हे उकरे चलथे ओमन हमारे लोगन ल भरमाए हवे कि छत्तीसगढ़ी में का रखे हे। अपन बाल बच्चा ल हिंदी अंग्रेजी पढ़ा और देश दुनियां भेज कहके मूल संस्कृति के जुड़ाव ल जर सहित उखानत हे काबर कि भाषा नई रही त संस्कृति तो अपने आप विलुप्त हो जाही। बहुत अकन लोक परब लोक कथा कहनी गीत भजन सब नंदावते जात हे। नवा पीढ़ी मन टीवी रेडियो पेपर में जोन देखथे ओला ही अपना लेथे। संस्कृति विभाग कुछेक लोक कलाकार मन के नाचा गम्मत बाजा रुजी के प्रदर्शन कराथे फेर ओकर आरो पता बने नई होय। आजकल विभाग के मेहरबानी में ही चंट कलाकार चलत हे।बाकी लोक कलाकार ल काम तकों नई मिलय जबकि एक समें अइसे रहीस कि साल में चार महीना किसानी आठ महीना कलाकारी म निकल जाय। मेला मड़ई जयंती परब छठी बिहाव मरनी हरनी तकों म तरह तरह के लोक कलाकार मन काम अउ मान सम्मान मिलय टीवी सीडी फिलिम सनीमा अब तो मोबाईल बैरी हर सब ल निगल लिस। सार्वजनिक मनोरंजन हर पारिवारिक अब तो मोबाईल हर एकल मनोरंजन के रुप मे लोक तत्व ल पूरा खतम कर डारिस।
छत्तीसगढ़ी ल 2007 मे राजभाषा बनाय के 18 बछर बीत गे फेर कोनो बढ़वार नई हे. पुरा राजभर म 18 ठन आवेदन आदेश घलाव छत्तीसगढ़ी म दिखऊ सुनउ नई हे. लोगन तको लिखें पढ़े बर कनउर मरथे अइसे कइसे अपन मनोदशा ल बनाय राखे हे ओकर गम नई मिलय. जबकि राजभाषा आयोग हर सरलग सभा सुसाटी के करत जनता मन सो गिलौली करत आवत हे. मय अपन सचिव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कार्यकाल म कतको घाँव जोजिया डारे हव फेर सब कोजनी का सेती बौरे नहीं न कोनो समस्या बताय. का साहेब मन छत्तीसगढ़ी आवेदन ल स्वीकारे नहीं या उकर ऊपर कार्यवाही नई करय कोनो पच परगट बताय घलो नहीं.तब करन त करन इंहा के भाषा बर बाना बांधे मनखे मन तको कठुवाय रहिथे. भाषा बर रोजी रोटी पाय के आस म 2013 ले छत्तीसगढ़ी म एम ए करे एक हजार बेरोजगार छात्र मन संगठन बना के संघर्षरत जरुर हवे फेर उनकर बात हर जिहा पहुंचना चाही उहाँ तक पहुँच नई पात हे. काबर अइसे हे एकरो गुनान करे जा सकत हे.
शासन प्रशासन के मजबुरी हवे कि छगत्तीसगढ़ी हर आठवी अनुसूची म संघरे नइहे ते पाय के ये भाषा के शिक्षक अनुवादक अधिकारी कर्मचारी आदि बनाय बर विज्ञापन नई निकाल सकत हे. स्कूल मे हिंदी के सहायक भाषा बोली समझ कुछेक पाठ मिंझारे हवे ओला छत्तीसगढ़ी भाषी हिंदी के शिक्षक मन पढ़ा लेवत हे ते पाय के अलग से भर्ती नई होवत हे. ये हर बड़ बिचित्र बात आय.
असल मे छत्तीसगढ़ हर ब्रिटिश काल मे आजादी के बाद 1950 तक सीपी एंड बरार के हिस्सा रहिस. तब अंग्रेजी / मराठी हर राजभाषा रहिस अउ सरकारी कामकाज उही भाषा के संग हिंदी मे होवत रहिन. काबर कि लॉर्ड माइकले के शिक्षा नीति के चलते स्कूल में मराठी के जगा हिंदी में पढ़ाई लिखाई होईस. जब 1 नव 1950 मे जब मध्यप्रदेश के गठन होइस तब देश के मांझोत मे होय ले प्रमुख रुप से हिंदी भाषा राज्य "क "श्रेणी मे संघार दे गिस. घुन मे कीरा कस छत्तीसगढी रमजा गे. काबर कि अंग्रेजी मराठी जैसे भाषा ल कतको बच्छर ले संग रहें ले घलो आत्मसात नई करे रहेन. भलुक रामायन, महाभारत, आल्हा रहस, पंथी,सतनाम निर्गुण भजन,कबीर रैदास भजन के चालागन रहिस अउ लोगन ब्रज अवधि भोजपुरी ल छत्तीसगढ़ी कस आत्मसात कर ले रहिस. ये भाषा के कवि गायक कलाकार मन नाचा गम्मत रहस लीला सत्संग प्रवचन करत जनजीवन म बड़ गहराई ले प्रभावित करे रहिन. ते पाय के यहीं भाषा विभाषा बोली के मिंझारा सरुप हिंदी ला अपना लेन अउ "क" श्रेणी जेकर मातृ भाषा अउ राजभाषा हिंदी घोषित हो गई. इसमें उप बिहार मप्र संघरे हे ते पाय तछत्तीसगढ़ राज हर "क" श्रेणी मे अपने आप आ गे.अउ इंहा हिंदी भाषी उप बिहार मप्र वाले मन के शासन प्रशासन अउ उदयोग बाईपार मे एकतरफा एकाधिकार होगे. मतलब भाषा हर विकास के प्रमुख कारक बन गे.
जबकि छत्तीसगढ़ राज अलग होइस उही समे येला ख श्रेणी मे राखे के जरुरत रहिस.जैसे महाराष्ट्र गुजरात राजस्थान हरियाणा पंजाब आदि हवय.भले ओ समे नई हो पाईस फेर सबो झन ल उमिहा के छत्तीसगढ़ ल "ख" श्रेणी मे राखे बर उदिम करना चाही. काबर कि शिक्षा के सवा सौ साल के इतिहास अउ सतत प्रचार प्रसार के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र मे हिंदी के व्यवहार चिटको नइहे. छत्तीसगढ़ी अपनाबो तभेच मराठी गुजराती हरियाणवी /पंजाबी जइसे स्थिति छत्तीसगढी के होही अउ स्वतंत्र विकास के रास्ता खुलही. इंहा के संपर्क भाषा हिंदी रही .
तीसरा श्रेणी" ग "आय जेन उड़ीसा बंगाल असम सेवन सिस्टर्स राज्य,आंध्रा कर्नाटक तमिलनाडु केरल जैसे स्वतंत्र भाषाई राज्य हैं. ऊहा अपन अपन राज के भाषा म ही शिक्षा रोजी रोजगार दे जाथे। इहाँ सम्पर्क भाषा अंग्रेजी हवे.
तेकरे सेती देश ले अंग्रेजी हट नई पात हे न अब ऐसे कोनो शक्ति नाईये कि ये औपनिवेशिक ब्रिटिश सत्ता के भाषा ल खारिज कर सके। काबर कि ज्ञान विज्ञान उद्योग व्यापार न्यायलय के भाषा अंग्रेजी हो चुके हे।
तब कम से कम राज्य के अस्मिता अंचल के सांस्कृतिक महक ल बचाएं सेती स्थानीय भाषा में शिक्षा राजकाज जैसे मानविकी समूह के विषय के पढ़ाई लिखाई कर के जतने तो जा सकत हे।
जय छत्तीसगढ़ जय छत्तीसगढ़ी।
डॉ अनिल कुमार भतपहरी
सेंट जोसेफ टाउन अमलीडीह रायपुर छत्तीसगढ़
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