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हिंदी और राष्ट्रप्रेम
जम्बूद्वीप प्राचीन भारत की जनभाषा प्राकृत पालि और मध्यकाल से आयातित अरबी फ़ारसी की युति से 14 वीं सदी में हिंदी भाषा अस्तित्व में आई । इसके साधकों और प्रेमियों ने अपरिमित और अप्रतिम साहित्य रचकर इसे वैश्विक विस्तार दिया। परन्तु दुर्भाग्यवश ब्रिटिश औपनिवेशिक की अंग्रेजी भाषा और उससे रौब दाब से यहां के प्रशासक वर्ग जिनकी संख्या महज 10% ,भी नहीं हैं के मोह के कारण तकनीकी शिक्षा तो दूर ऑफिस बैंक न्यायालय की भाषा भी आज पर्यंत नहीं बन पाई बल्कि अंग्रेजी के द्वारा ही देश वासियों के ऊपर हमारे ही लोग अंग्रेजों जैसा व्यवहार करते आ रहे हैं।
आजादी के अमृतकाल में भी देश वासियों को उनकी अपनी मातृ भाषा में शिक्षा और न्याय नहीं मिल पाना कितना दुर्भाग्य हैं।
लगभग सवा अरब वाली विशालकाय देश का अपना एक राष्ट्रीय भाषा तक नहीं हैं। संपर्क भाषा के रुप में चंद मुट्ठी भर लोगों द्वारा औपनिवेशिक भाषा अंग्रेजी को बनाएं रखना कौन सी देश भक्ति और राष्ट्रप्रेम हैं?
धर्म को राष्ट्र प्रेम से जोड़ने वाली बातें तो अक्सर सुनी जाती हैं पर भाषा को राष्ट्रप्रेम से जोड़ने की बातें क्यों सुनाई नहीं देती?
हिंदी दिवस पर निरीह जनता जनार्दन को बधाई जिन्हें उन्हें न्याय मांगने और फैसले जानने के लिए उनके हितार्थ कानून को समझने किसी अंग्रेजी दा वकील की सहारा लेने पड़ते हैं। यह देश वासियों का सौभाग्य हैं कि दुर्भाग्य हम जैसे मूढ़ मति को आज तक समझ नहीं आया।
भले तकनीकी चिकित्सीय शिक्षा के पाठ्यक्रम बनाने और लागू करने में अक्षम हैं परंतु इनके अतिरिक्त न्यायालय और केंद्रीय कार्यालयों में बैंक व्यापारो में जनता की भाषा व्यवहृत नहीं कर पा रहें हैं यह कैसी विडंबना हैं।
सच कहे तो हिंदी विविध मातृभाषाओं की मेल से बनी हुई हैं ।यह भारतीय जनमानस को समन्वय भाव से बांध कर रखने वाली हैं परन्तु औपनिवेशिक अंग्रेजी भाषा और उनके आशिको ने इन्हें दासी बनाने पर तुले हुए हैं।
अंग्रेजी से हिंदी और सभी मातृभाषाओं को खतरा हैं। यही हालत रहे तो 50 साल बाद अंग्रेजी सबको निगल लेगी। ग्लोबल विलेज में युवावर्ग अर्धनग्न हो रॉक _पॉप करते रहेंगे वृद्धाश्रमो में वर्तमान अंग्रेजी प्रेमी जन सेवाएं गवार ग्रामीणों से सेवाएं लेते अपने काबिल संतानों से चंद बातें करने तरसते रहेंगे।
बहरहाल अमृतकाल में देशवासियों को हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई। कृतज्ञ राष्ट्र की बिंदी हिंदी बने इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ...
जय हिंद जय हिंदी
चित्र: हिंदी की सुप्रसिद्ध लेखक नैमिशरॉय जी के साथ
डॉ.अनिल कुमार भतपहरी/ 9617777514
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