Tuesday, July 4, 2023

धनवंतरी और धनतेरस

#anilbhatpahari  

धनतेरस एंव लक्ष्मी पूजा
            बनाम 
धन्वतरी और लक्ष्मी 
         
    कृषि संस्कृति की महापर्व फसलों की घरों में  आगमन की खुशी में मनाई जाने वाली दीपावली पर्व में धन तेरस और लक्ष्मी का क्या आशय और महत्व है पर विचार करते हैं। क्योंकि आज के दिन हर शहर कस्बा व बडे ग्रामों में लोग जमकर खरीद - फरोख्त कर रहे हैं। त्योहार की खुशी में इस तरह कर्ज लेकर या उसमें डूब कर खुशी मनाने का यह नायाब तरीके का ईजाद वाकिय में अल्हादकारी व रोचक हैं। साथ ही कैसे अर्थ का अनर्थ कर लिए गये है इन पर भी सम्यक् दृष्टिपात समीचीन हैं।
      धन्वतरी स्वास्थ्य देता है और स्वास्थ्य ही धन या  लक्ष्मी  है जिनके द्वारा ऐश्वर्य  (सुख ) का उपभोग किया जा सकता हैं वही ऐश्वर्य वान ही ईश्वर हो जाते हैं। जिनके पास सदैव सकारात्मक चीजें रहते हैं।  परोपकार  और सदाचार से व्यक्ति ही निर्मल यश के प्रतिभागी होते हैं और वे  मृत्यु  के बाद भी अपनी  श्रेष्ठ विचार  से अमर रहते हैं। 
      इस तरह देखें तो व्यक्ति के जीवन में इन  दोनो  का अतिशय महत्व हैं। क्योकि यह आपस में एक दूसरे से जुडे हुए हैं। जो स्वस्थ रहेगा संपदा उनके अधीन रहेगी और जो रोगी होगा उनके पास  संपदा निकल जाएगी । 

   वर्षा काल बीतने और शीत ऋतु के संधिकाल में जब सर्वत्र स्वास्थ्य वर्धक  गुलाबी ठंड हो तब व्यक्ति इसे अर्जित करने उद्यम करते हैं। शरद पूर्णिमा में उसी अमृत की चाह में रतजगा करते कार्तिक माह की अल सुबह सैर और स्नान हमें निरोगी करता हैं। इसे कायम रखने का प्रयत्न सदैव करना चाहिए। 

भारतीय संस्कृति में समुद्र मंथन एक ऐसा रुपक है जिसे अनेक विद्वत जन अनेक तरह से व्याख्यायित करते हैं।
       आर्य और अनार्य  के संघर्ष को देव और दानव या कहे सुर और असुर के बीच हुए संग्राम का हिस्सा तक मानते हैं। देवासुर संग्राम का अंतिम परिणति समुद्र मंथन और वहाँ से प्राप्त अमृत हैं। जिनके पा‌न कर अमरत्व को अर्जित करना हैं।
      ऐसा लगता है कि अमृत एक औषधि हैं जिससे द्वारा कष्ट और जिल्लत की जिन्दगी को सुख एंव  कीर्ति से युक्त जीवन में बदला जा सकता हैं।  पर यह कैसा औषधि हैं ? क्या द्रव है जो घड़ा में भरा हुआ होता हैं ? इन पर विचार आवश्यक हैं। 
           समुद्र मंथन में 14 तरह के रत्न निकले जिसमें विष से लेकर अमृत तक हैं।  कोई कार्य के आरंभ में विष ही निकलते हैं । सतत परिश्रम और निष्ठा से ही  सफलता रुपी अमृत  मिलता हैं। 
       
    दरअसल विष एक तरह  शंका - कुशंका ,मत- मातान्तर ,संघर्ष, नफरत, द्वेष ,भाई -भतीजावाद  जात पात ,खेमेबाजी ,और परस्पर संघर्ष हैं। इन सबसे निजात पाकर व्यक्ति सतत संघर्ष करते ज्ञान और चेतना से ऐसी सफलताएँ अर्जित करता है कि वे  साधन- सक्षम हो जाते है। फिर वे परोपकार और सबके लिए मंगलभाव रखते हैं। तब वह विमल यश को प्राप्त करते हैं।
 कलांतर में  लोग  उनके सद्कार्यो को सदैव स्मृत करते हैं। यही उनका अमृत पान कर अमर हो जाना हैं। 
  नश्वर देह की  जगह उनकी विचार अमर हो जाते हैं।
     
          आजकल धन्वतरी विचित्र ढंग से  धन का देवता हो गये और कर्ज करके इस दिन सोने चांदी के जेवर बर्तन और भौतिक सुख - सुविधाओं की वस्तुएँ  यथा कार ,बाईक,  टी वी  ,एसी, कुलर आदि  उत्पाद कर्ज या चञद बचत  से  लेकर तनावग्रस्त होकर  बीमार  व कलह में पड़े  रहते है । वणिक गणों और उत्पादक वर्ग ऐसे लोक लुभावन विज्ञापन व  स्कीम लाते हैं कि अमीर -गरीब सभी अपने हैसियत से बढकर खरीददारी करते हैं।  धनतेरस को लक्ष्मी खरीदने का बाजार बना लिए हैं। इससे सबसे अधिक  मध्यमवर्गीय कृषक समुदाय सर्वाधिक प्रभावित होते हैं।

    कृषकों के फसल खेतों में है उनके पास कुछ नहीं हैं। फिर भी वे दुनी या डेढ़ी ब्याज से महज महिना दिन के लिए आकंठ कर्ज में डूब जाते हैं। उसे उतारने पूरे वर्ष भर अनुक्रम चलता हैं।  सच कहे तो दीवाली में दीवाला निकल जाते हैं।  एक किसान कर्ज में जन्मता है और कर्ज मे डूब कर जाता हैं। कृषि संस्कृति का यह महापर्व दीवाली कृषकों का ही बलि लेने का पर्व के रुप में ‌बदल सा गये हैं। 
   इस तरह  पुष्प नक्षत्र एंव धनतेरस  आम जनता को महाजनों के  ऋणी (गुलाम ) बनाने  का महापर्व हैं। 
 
        बहरहाल खुशियाँ  खरीद फरोख्त में नहीं बल्कि तनाव रहित अपने आय के दायरे में संतुष्ट भाव से जीने में हैं। और जब नगद हो तब आवश्यक वस्तुएँ की  खरीददारी हो इनके लिए कोई तिथि पर्व का निर्धारण बिल्कुल अनुचित व षडयंत्र जनित हैं। इन सबका ध्यान रखते हुए स्वास्थ्य व संपदा पाने की मंगलकामनाएं व  दीपावली पर्व की हार्दिक बधाई ।

https://youtu.be/m-6VTP2TABo
                -डाॅ. अनिल भतपहरी/9617777514

Saturday, July 1, 2023

मंहगाई गीत

#anilbhatpahari 

मंहगई गीत 

दू सौ किलो राहेर दार ,डेड़ सौ म  पताल 
का बतावव संगी तोला ,हमरों  हाल-चाल 
ये मंहगाई के मारे होगे, जीव के जंजाल ...

बिहने  ले बिस्कुट  बर रोवत  हे टूरा 
नवा लुगरा बर लुगाई  फोरत हे चूरा 
कत्कोन कमाथन ,फेर होथे बाराहाल ...

खेती हर अपन  सेती ,नौकरी  न चाकरी 
मांगे न मिलय उधारी ,बता अब का करी 
ओरमा के गर मं फासी, ये झंझट ल टाल ...

गोंदली सरकार बदलथे अइसन तो देस 
तभो ले कोनो  चेतय  नही  भारी कलेस 
पाच साल म टेकाथे बंगला,जे होथे सरकार ...

     - डा. अनिल भतपहरी / ९६१७७७७५१४

Thursday, June 29, 2023

युति की युक्ति

।।युति की युक्ति ।।

उनकी धारदार बोली 
रोकेंगे मारकर गोली

समय बतायेगा असर 
छुटेगा न कोई  कसर  

ये दहाड़ेगा ओ चिंधाड़ेगी  
मिलेगी सत्ता साथ लड़ोगी 

है तुम्हारे ही अंदर  शक्ति 
सूत्र एक ही युति से युक्ति 

दहलेगा शत्रु का छाती 
युति से करो करामाती 

खेल हुआ बहुत धर्म-कर्म 
समझाओ उन्हे असल मर्म 

ऐन केन पाना संप्रभूता  
सदियों से इनकी दासता 

वाग्जाल विरासत के नाम 
तोड़ बंधन  करो सद्काम 

महज तुम्हारे एक वोट 
करेगी ऐसी जगह चोट 

न रहेगा बांस न बजेगी बंशी 
ये छल -छद्म की नुरा- कुश्ती 

लुभावने बैन और प्रलोभन 
करेंगे खरीदने  के सौ जतन 

बचों उनसे और रहो एकजूट 
नाम कमाने  के मोह से मुक्त 

है तुम्हारा एक ही बड़ा प्रयोजन 
भक्ति नहीं दु:ख मुक्ति का जतन 

तुम्हे जगाना होगा अब जन -मन 
सदियों से जिनके मन है विष्णन 

युक्ति एक हो और हो नव प्रवर्तन 
लेना होगा सबको साथ साथ प्रण 

टूट कर तोड़ कर बिखरे  कण- कण 
अब तो मिलकर जुड़कर बनों बहुजन  

            - डा. अनिल भतपहरी

Tuesday, May 30, 2023

संपादकीय .... सतनाम संदेश जुन 2023

संपादकीय...

विगत अनेक वर्षों से हमारे होनहार युवाओं के लिए शासकीय अवसर के दरवाजे बंद सा हो गये थे। क्योकि आरक्षण का निर्धारण राजकीय और राष्ट्रीय सत्ता की खीचतान से उलझ सा गया था।   
      भीषण कोरोना काल  से असमान्य जीवन से उबरे तनाव ग्रस्त घर परिवार व समाज इन्ही के आशाओं का केन्द्र उनके होनहार संतति आन लाइन परीक्षा से उत्तीर्ण  नव स्नातक / स्नातकोत्तर व डिप्लोमा धारी नव युवक गण  दलीय सत्ता प्रतिद्वंद्विता की विकट  स्थिति से निरुत्साहित होकर आक्रोशित हो चले थे ।उनमें नव उत्साह व कुछ कर पाने की ललक को कायम कर पाना  परिजनों के लिए प्राय: चुनौती बन गया था । 
   तभी न्यायालीन फैसले ने राज्य के नवयुवकों में नव उत्साह का संचार किया । शासन- प्रशासन  विभिन्न विभागों की रिक्तियों के विरुद्ध अनेक पदों की विज्ञापन जारी किया फलस्वरुप  मई की चिलचिलाती धूप में उत्साहित वही नवयुवक गण च्वाइस सेंटरों ,कम्युटर केन्द्रों, रोजगार आफिसो, आवेदन देने जमा करने  में लगे है ।  अनेक पुस्तक  दुकानें  ट्युसन केन्द्र में  आने जाने लगे हैं। जहां विरानी थे वह जगह अब आबाद हो गये हैं।  नवयुवकों का उत्साह दर्शनीय हैं। ऐसा लगता है कि खुशियों सौगात ले आए ...इन लोगों का लक्ष्य दिखाई पड़ने लगा ।  इसके पूर्व किमकर्तव्यविमूढ़म टाइप देश दुनिया से बेखबर हताश -निराश  थे।
    बहरहाल होनहार और योग्य नव युवकों को उनका अपेक्षित लक्ष्य मिले इसके लिए वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में  जी जान से जुट जाए क्योकि असवर सदैव एक अनार सौ बीमार टाईप का रहता हैं। इसलिए प्रतिस्पर्धा के लायक बनना ही होगा । चाहे नौकरी- चाकरी हो या  उद्यम ब्यापार या फिर खेती किसानी ही सही इन सभी जगहों पर प्रतिस्पर्धा है । हमारे युवा वर्गो को चाहिए कि अंत्याव्यवसायी योजना के तरह स्वरोजगार , लघु उद्योग के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास करे। क्योकि सबके लिए शा नौकरिया संभव नहीं। हर कार्य उत्कृष्ट रहता है मनोयोग से करने पर प्रत्येक छोटे बडे कार्य कर सफलताओं के शिखर तक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा द्वारा पहुंचा जा सकता हैं। 

 इस  तरह से  देखे  तो मानव जीवन संघर्षमय प्रतिस्पर्धा ही  हैं। सुख शांति व सुकून पाने के लिए भी संघर्ष यानि सद्कर्म आवश्यक हैं। बिना इनके कोई रास्ता नही न ही कोई आसमानी दुवाएं या ईश्वरीय कृपा विद्यमान है  इस महामारी ने साबित भी किया हैं। 
     अन्यथा अबतक यह मान्यताएं रही है - अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम ... इस प्रवृत्ति का दिन  लद चुका है । अब तो कर्मो से ही गुजारा चल पाएगा । इसलिए भाग्यवादी के जगह कर्मवादी बने । यह सद्गुरु घासीदास बाबा के अमृत वाणी  भी है- "तय अपन बर बारा महिना के खर्चा जोर ले तब भक्ति कर  न इते झन कर।"
      इस तरह की विरासत और संस्कृति के संवाहक सतनाम पंथ और उनके अनुयाई जीवन में लक्ष्य प्राप्ति हेतु प्रतिबद्ध ढंग से सतत परिश्रम में लगना चाहिए चाहे पुश्तैनी खेती हो या पढाई लिखाई या उद्यम व व्यापार रुचि अनुसार इन सब कार्यो में नवयुवकों को प्रवृत्त होना चाहिए ।आर्थिक विकास अनेक विकासों के सहचरी है इसलिए आत्म निर्भरता बेहद आवश्यक हैं।
   बहरहाल ज्ञानार्जन और मनोरंजन हेतु अनेक ग्रामों में 1-2-3-5-7 दिवसीय  सतनाम सत -संगत भजन कीर्तन  का प्रचलन तेजी से चल रहा है जो स्वागतेय पहल है । इससे समाज सुसंगठित व सुसंस्कारित होते है और न ई पुरानी पीढ़ी  परस्पर सार्वजनिक जीवन व्यवहार के कदाचार सीखते -सीखाते हैं।
   गुरुघासीदास बाबा जी ने इसलिए रामत रावटी जैसे सांस्कृतिक अनुष्ठानों का प्रवर्तन किया । हमारे पास एक उच्च स्तरीय आध्यात्मिक विरासत और श्रेष्ठतम आयोजन है उनका क्रिन्वायन आयोजन समितियां गठित कर अपने आय से कुछ बचत कर परस्पर  बरार से सहयोग से सार्वजनिक व धार्मिक आयोजन करे और समाज में सांस्कृति सुरभि का प्रसारण करें।
    ऐसी उम्मीद के साथ हमारे नवयुवकों की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कृषक समाज को  आने वाला "बीज बौनी बर बतर बेरा "  के  बधाई ।
     जय सतनाम ....

   डा. अनिल कुमार भतपहरी 
           प्रबंध संपादक 
          सतनाम संदेश 
प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज

Sunday, May 28, 2023

तन तिजौरी म ( दो भजन )

[5/24, 09:25] Anilbhatpahari: तन के तिजौरी म रतन भरे हे सब मनखे गुन के खान 
बनना निगड़ना अपन हाथ म  सब  संगत के पहिचान 

खेलत खात रात दिन जिनगी ह पहावय ।
छप्पन भोग करथे तभो ल ये मन नइ अघावय ।/
 मन भंवरा मतवार किंदरय ,कर रुप मदिरा पान ...

मया पीरित बर बिहाव लगिन कराये गौना 
ये जग ब इरी जहर महुरा लागे मीत मतौना 

अब तो अधियागे खिरत हे, सबो आन -बान

जग अंधियार सुझै न कछु ,अब तो का करन गा 
तन डोलत हे मन हे भारी अब तो  गुरु शरन जा 
एक साहारा हवय  संतो ,सुमर ले सतनाम ....
[5/24, 10:16] Anilbhatpahari: तन के तिजौरी म रतन भरे हे, दया मया सद्भाव 
बनना बिगड़ना अपन हाथ म सब संगत के प्रभाव 



जेन बोबे तेन लुबे संगी,खेत हो या हिरदय 
अलकर दु: ख का कहिबे संगी,
सहर पहर बन किंदरय 
मन म  तोर सइता नइये त कछुचों आव जाव ....


बीच गली म  डांग गड़ा के खेलत हे  डंगचघहा 
बीच भंवर म डोंगा फंसगे  तउरत हे डोंगहा
सद्गुरु हवे एक सहारा उही करहि नर न्याव ...

Tuesday, May 16, 2023

रंग महल में बैठा जोगी

सतनाम -संकीर्तन 

रंग महल मे बैठा जोगी 
मन बैरागी होय 
रिमझिम माया के बरसा बरसे  
धधकत आगी होय ...

उलट -पुलट ये दुनिया सारी 
भ्रमित भटकत नवल शिकारी 
सद्गुरु  साखी जोय ...

सरगपरी छन-छन नाचे 
मृग मरीचिका सोय 
साधक साधे सिद्धबानी 
सब मरजी का होय ...

मरना ऐसे देश में 
जहां न परिजन कोय 
पशु पंछी भोजन करे 
यह  तन  मांदी  होय ...

    - डा. अनिल भतपहरी / 9617777514

Friday, May 12, 2023

दगर दगर बरत हे चोला

दगर- दगर बरत हे चोला 
देखे हंव ओला ...
जावत डोंगरी डहन, गावत पंथी भजन 
दगर -दगर बरत हे चोला, देखें हंव ओला ...

 चंदन तिलक लगाए ,कंठी जनेऊ पहिने 
धोवा के धोती सुघ्घर ,पांव म खड़ाऊ पहिने ...
सुमरत सतनाम रेंगत हे ओहा ...

निकले भंडार ले मुंदरहा रेंगत होगे   हे दुरिहा 
लगथे जावत हवय  गिरौद गौवतरिहा 
सुमरत सतनाम रेंगत हे ओहा ...

   रचना - 10-5-2023