जीताएन तब ले भैरा हो गईन
साहेब ल हमर गोठ नइ भाईन
बिन भाषा के मूक हो गईन
बटन चपक का चूक हो गईन
करय तो अब भल का करय
ले मांदर मंजीरा भजन करय
बिगड़े हे इहलोक हमरे अब
परलोक सुधारे जतन करय
तउन खातिर आए सरग़ दूत
दरस परस बर भारी जटाजूट
जे भीखास के उवे नवा सुरुज
चका चौंधा देख भारी अचरूज
धरमे करमे बर बनाएं उन ल
वोट दे के तय कमाएं पुन ल
कटय जंगल के खीरय धरती
चाहे परिया परे रहय तोर खेती
बनगे मंदिर सज के दरबार
फेर उजरे लगिन खेती खार
न कहूं रोजी न कछु रोजगार
कोंदा भैरा अंधरा सरकार ...
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