गुरु घासीदास जयंती पूर्व सतनाम शोभायात्रा की बाहर
समाज में समानता एवं सौहार्द्र स्थापित करने सद्गुरु घासीदास बाबा जी की अमृतवाणियों /उपदेशों पर आधारित सार्वजनिक रुप से राजधानी रायपुर में 1995 से आरम्भ यह आयोजन देश के अनेक जगहों पर हर्षोल्लास पूर्वक आयोजित होने लगे हैं। आयोजको एवं सहभागियों के प्रति आभार एवं मानव समाज को हार्दिक बधाई।
ज्ञात हो कि गुरु घासीदास जयंती की शुरुआत में ही धर्म ध्वज "पालो " जिसे संत /महंत/ भंडारी के घर तैयार करते हैं को परघा कर पंथी अखाड़ा सजाते हर्षोल्लास पूर्वक जैतखाम तक शोभायात्रा करते आते हैं।उसी परंपरा को अब सार्वजनिक रुप से बड़े पैमाने पर मनाने की शुरुआत 1995 से हुई।
चित्र १आयोजन की परिकल्पना के समय का छायाचित्र गुरु घासीदास छात्रावास आमापरा रायपुर
२ प्रथम आयोजन का विज्ञापन गुरु घासीदास का रेखाचित्र ( मेरे द्वारा रेखांकन)
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