Saturday, January 3, 2026

बेनामी शादी में

लघु कथा 

बेनामी शादी में ...

      आजकल वे कही कोई गोष्ठी- संगोष्ठी में आमंत्रित नहीं होते।पता नहीं  कैसे अलग -थलग होते जा रहे हैं? एक समय था जब इनकी पुछ -परख  व आव भगत होते ही रहते थे ! पर इतनी जल्दी सब एकाएक बंद हो जाएन्गे ,यह सोचा नहीं था! हालांकि  अब  पहले से अधिक सोच-समझकर बोलने लगे थे।  
   
"प्रगतिशील क्या है? पहले यह निर्धारण हो।तब व्यक्ति के   प्रगतिशील होने का मूल्यांकन,  स्वत: या उनके जानने वाले लोग उस आधार पर कर सकते हैं।"
    आगे जोर देते हुए कहे -
    "असल में भारतीय मध्यम वर्ग में प्रगतिशीलता आयी ही नहीं हैं।
निम्न वर्ग की स्वच्छंदता,उनकी मजबुरी हैं और उच्च वर्ग की स्वच्छंदता उनकी ऐय्याशी हैं। "
       छिटपुट  तालियां गूंजी।
थोड़ा जोश में भरकर कहा-  
    "विचार भले प्रगतिशील हो जाय पर  प्रवृत्ति में आदमी जड़वत ही रहता हैं। बिना जड़ के वे लहलहा भी नहीं सकते।" 
ये क्या? सभागार में सन्नाटा पसर गया। 
 अर्सा़ बाद उन्हें तथाकथित  प्रगतिशील लोगों की एक संगोष्ठी में व्याख्यान के लिए आमंत्रित किए गये थे। उनकी बातें सुन  तमाम लब्ध प्रतिष्ठित अतिथियों सहित मुख्य अतिथि व आयोजक हतप्रभ सा रह गये। भौंचक एक- दूसरे से स्वयं को  छिपाते पर दूसरे में कुछ तलाशते भोजन में भीड़ गये । 
       कुछ बिना जड़ वाले उन्हे   कोसने लगे कि "प्रगतिशील मंच पर  इस तरह पुरातन पंथी जड़ वाली दकियानूसी बातें नहीं होनी चाहिए ।" कुछ कह उठे - प्रगतिवादी मंच पर ऐसी आलोचनात्मक टिप्पणियाँ आखिर  कैसे कोई कर सकते हैं। अभिव्यक्ति का आजादी का मतलब यह तो नहीं कि हमारी अस्मिता पर प्रश्न खडे किए जाय .. !
     आयोजक चिल्ला उठे - क्या करे भाई "पुरा महौल खराब कर दिए !" 
सुटेट -बुटेट ,सजे- धजे इत्र से महकते व  चहकते महफ़िल से वह बेचारा ... ऐसे निकले जैसे ....बेनामी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ! ...तभी गेट पर खड़े चौकी दार ने कहा- " साब जी ! आपकी बातें एकदम सही हैं।  बिना जड़ के जीवन कटी पतंग सा है!" ...साब जी  निकास इस तरफ हैं साब जी... जय हिन्द  !

-डॉ. अनिल भतपहरी 9617777514

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