पृथक छत्तीसगढ़ के लिए किए गए हर प्रयास जैसे रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के मंत्री नकुल ढीढी एवं उनके सहयोगियों का 11 दिवसीय जेल यात्रा , डॉ खूबचंद बघेल का भातृसंघ गठन कर जनांदोलन करना, शंकर गुहा नियोगी/हरि ठाकुर का छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा,छत्तीसगढ़ समाज पार्टी का अखंड धरना, अजीत जोगी जी का पदयात्रा एवं छत्तीसगढ़ी सेवक में यहां के साहित्यकारों का अलख जगाना सौभाग्य वश इनमें मुझे भी छात्र जीवन में सहभागिता करने का अवसर मिला हैं।
अब राज्य के रजत काल में सम्यक मूल्यांकन का अवसर हैं कि किसके लिए और किसलिए राज्य बना ? क्या वह चरितार्थ हो रहे हैं कि समकालीन समय में हमारे पुरखों ने जो स्वपन देखें वह कहीं बिखर तो नहीं रहें हैं? देश की फेफड़ा कहे जाने वाले हसदेव और देश दुनिया से अछूते अबूझमाड़, गढ़ बंगाल,रम्य इंद्रावती की कछार एशिया का बेहतरीन ऑक्शीजोन कांगेर घाटी उजड़ रहे हैं। यहां के मूल वाशिंदे नक्सली और पुलिस के मुठभेड़ के शिकार हो रहें हैं। आउट सोर्सिंग से बेरोजगारी और उद्योग व्यापारिक जगत में पर प्रांतिकों का एकाधिकार वनांचल खासकर बस्तर में नक्सल मूवमेंट फिर सलवा जुडूम या शांति व्यवस्था के चलते विस्थापित हो छोटे बड़े शहरों में दर दर भटक रहे भोले भाले जनमानस कुली कबाड़ी कर जीवन निर्वाह कर रहे हैं। औद्योगिक विकास के कारण रेगिस्तान और बंजर हो चुके राज्यों को संवारने ,उन्हें रॉ मटेरियल देने क्या शस्य श्यामला छत्तीसगढ़ उजड़ने विवश और बेबस हैं? राष्ट्रीयता के नाम पर छलते जा रहे छत्तीसगढ़िया।
आज नवभारत के लोकप्रिय छायाकार भाई गोकुल सोनी जी यह छायाचित्र और लघु आलेख देख पढ़ कर वह मंजर स्मृत हुआ जिसका हम जैसे लोग बचपन और अध्ययन काल से साक्ष्य व सहभागी रहें हैं।
डॉ. अनिल भतपहरी/ 9617777514
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