Thursday, January 8, 2026

नई शिक्षा नीति

 नई शिक्षा नीति 

स्थान ग्रामीण या मध्यम वर्गीय क़स्बाई परिवार. जहाँ रेडियो या टीवी में सुबह 8 बजे समाचार प्रसारण हो रहें हैं..इस पर किसी का ध्यान नहीं हैं और बेखबर दैनिक कार्यों मे लगे हुए हैं.. तभी पिता जी के कानो समाचार सुनाई पड़ता हैं - इस वर्ष हायर सेकेण्डरी 12 वीं की परीक्षा परिणाम घोषित कर दी गई. परिणाम 70%. हमेशा की तरह विगत एक दशकों से छात्राएं छात्रों से  बाजी मारती आ रही हैं. मेरिट मे भी सर्वाधिक बालिकाएं हैं. परिणाम लोक शिक्षा विभाग के बेवसाईट मे अपलोड कर दी गई हैं.मान मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने उत्तीर्ण विद्यार्थियों को बधाई देते उनकी उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनायें दी. आगे का समाचार.... पिता उत्साह पूर्वक अरे बेटा अम्बा तुम्हारा रिजल्ट आ गया  मोबाईल में देखों... 

अम्बा: हा पापा वें झट आटे गुंथ रही थी को छोड़ उठ खड़ी हूई और वास बेसिन से हाथ धोने लगी...
माता जी: अरे महरानी जी पुरा गुंथ तो लेती भगी नहीं जा रही. अम्बा बिना कोई जवाब दिये जल्दी से मोबाईल लेकर बेवसाईट खोलकर अपना रोल नंबर डाली पर नामांकन नम्बर स्मृत नहीं होने पर वें अपना प्रवेश ढूंढने लगी... तब तक पड़ोसन  अपने घर की बालकनी से आवाज लगाई.
अरे बधाई हो अम्बा मेरिट मे पास हो गई. बिट्टू के पापा बता रहें हैं.

तब तक अम्बा की धडकने सुनकर और बड़ गई पिता जी ख़ुशी से उछल खड़े हो गये और माता जी नमस्ते कर हाथ जोड़ने लगी... मोबाईल सर्च करतें अम्बा धन्यवाद देते दूर से प्रणाम कहीं.

थोड़ी देर बाद वो एकदम सी उच्चल पड़ी मेरिट मे सातवे स्थान प्राप्त की हैं सभी विषय मे डीकटेंशन हैं. सर्वाधिक अंक उन्हें हिंदी साहित्य मे मिली हैं. यह बड़े उत्साह से अपने पापा जी को बताई पास मे माता जी सट कर खड़ी मोबाईल को कौतूहल पूर्वक देख रही हैं.
 
पापा : बेटा नई शिक्षा नीति के तहत तुम्हे अब ऐसे विषय चयन करना हैं कि आगे चलकर एक अच्छा प्रशासनिक अफसर बनो. क्योंकि तुम्हे डॉक्टर बनना पसंद नहीं हैं क्यों सच कहाँ न? 

हा पापा क्लास मे प्रवेश के समय    वेलकम पार्टी मे मैंने दृढ़ता पूर्वक अपना एम बता दी थी कि मुझे डॉक्टर,इंजिनियर नहीं एक सक्षम प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश और समाज सेवा करना हैं.
शाबास तभी तो बारहवीं मे इतिहास, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र ली थी. मैं तो तुम्हारी मैथस का अंक देख इंजीनियरिंग करने का सलाह दिया था. पर तुम्हारी माता श्री डॉक्टर बनाना चाहती थी.
खैर बेटा जाओ और मिठाई दुकान से कलाकंद लेते आना. जेब से रूपये निकलते.. ये लो पैसे.
माता:  और हा,नाड़ीयल अगरबत्ती तो है, कपूर, सात बंगला पान जरुर लेते आना..
अम्बा चाबी ले बाहर पोर्च मे खड़ी स्कूटी को कपड़े से पोछने लगी.
     दृश्य 2
दृश्य बाजार का चारों ओर चहल पहल है वहाँ एक मिठाई दुकान के पास  अम्बा स्कूटी खड़ी कर ज्यो ही मुड़ी उनकी सहपाठी लडके लड़की मिल गये वें सभी मिठाई लेने आये थे कुछ ले चुके और हाथ मे मिठाई  लटकाएं हुए एक दूसरे को खिलाने लगे.
अम्बा तुम्हे मिठाई के साथ साथ पी वी आर मे फ़िल्म भी दिखानी होगी. बड़ी छुपी रुस्तम निकली यार!
   सहेलियां उन्हें गले से लगा ली माहौल खुशनुमा और चहकते हुए सभी एक -दूसरे को बधाई देते अपने अपने घर चली गई.
     पान खरीदने ज्यो ही पनवाड़ी की दुकान गई अम्बा देख कर चौकी कि उनका भाई आरव कुछ दोस्तों के साथ गुटखा सिगरेट पीने मे उन्मत्त थे. दूर से आकाश सिगरेट फेकते लपकते हुए अम्बा के पास जाकर गुस्से से गरियाने लगे.
आकाश - यहाँ क्या कर रही हो सुना है इधर लड़कियां नहीं आती? 
अम्बा - अच्छा ताकि तुम लडके गुलछर्रे उड़ाओ. 
आकाश - उंगली दिखाते देखोंsss
क्या देखों ! मैं यहाँ  पूजा के लिए पान लेने आई हूँ. 
 आकाश - तो घर मे मुझे क्यों नहीं कहाँ? 
अम्बा - तुम थे ही कहाँ और रहते भी हो? 
आकाश - अच्छा तुम क्या कहना चाहती हो  देखों बहस मत करो सभी इधर देख रहें है. अच्छा जाओ मैं लेते आ रहा हूँ.
अम्बा - नहीं लेकर ही जाउंगी या तुम्ही लाकर दे दो और घर चलो. तुम्हे पता होनी चाहिए कि मेरी रिजल्ट की ख़ुशी मे पापा मिठाई और मम्मी पूजन सामग्री मंगाई है. बात को चेंज करती हूई कहीं ताकि कोई बखेड़ा खड़ा न कर दे क्योंकि आकाश के स्वाभाव को अम्बा अच्छी तरह जानती समझती है. इस वर्ष आकाश भी इंजिनियर बनने कॉलेज ड्राफ कर PET दिया है और उनका रिजल्ट नहीं आया है.सो कुछ दोस्तों के साथ शहर के बाजार के आसपास  यु ही घूमते फिरते रहते है.


     3 दृश्य कॉलेज परिसर 

चारों तरफ छात्रों का शोर और सूचना पटल पर प्रवेश सूची की लिस्ट देखने उद्द्त है पंजे के एड़ी उठाकर या जम्प लगाकर उचक उचक कर नाम देखें जा रहें है.
अम्बा का नाम लिस्ट मे सबसे ऊपर था. इस बार आकाश भी प्रवेश हेतु  फार्म भरा तो  है पर नाम आने की भरोसा नहीं है.
भीड़ को चिरते अम्बा के पास गया जो अपनी स्कूटी के पास एक सहेली रेणु के साथ खड़ी थी.
आकाश - तुम दोनों का नाम फस्ट लिस्ट मे है. पर मेरा नहीं सेकेण्ड लिस्ट मे आएगा क्योंकि अभी कटाफ 65% है.
मेरा 61 है और एक वर्ष का गैप तो सेकेड लिस्ट मे आना तय है.
चलो घर एक सप्ताह के अंदर फीस पटाना है.

दृश्य 4
    
क्लास रूम बी ए प्रथम

प्रोफ़ेसर का कॉलेज प्रवेश 

 छात्रों का समवेत स्वर -गुड मार्निग सर 
 प्रोफेसर- गुड मार्निग, अच्छा  आपलोग सुप्रभात और नमस्कार भी कहना सीखो क्योंकि हमें अपनी संस्कृति भूलना नहीं चाहिए 
छात्रों- जी सर 

प्रोफेसर - तो बच्चों आप लोगो को पता है अपना अपना  मुख्य विषय और सहायक विषय क्योंकि आप लोग नई शिक्षा नीति के तहत नए पाठ्यक्रम पढ़ रहें है.
अम्बा - जी सर इनकी जानकारी बेबसाईट मे अपलोड है और चवाइस सेंटर में फार्म भरते पता है.
प्रो वेरी गुड क्या नाम है बेटा 
अम्बा - जी अम्बा पर बेटा क्यों सर मैं तो बेटी हूँ.
प्रो - वो इसलिए की कोई फर्क न हो 
अम्बा - जी ऐसा कहने मे ही फर्क या भेद सा हमें चुभता है. हमें बेटी या छात्रों कहें. 
प्रो अच्छा ऐसा क्यों?
अम्बा - क्योंकि ऐसा हमारे पिताजी अक्सर कहते है पर मुझे उनका बेटा अच्छा नहीं लगता. अच्छा और सफलता के काम करे तो भी क्रेडिट बेटा को बेटियों को नहीं ऐसा ना हो सर.


प्रो-  ए बात है पर मुझे क्या आजकल सभी जगहों घर आफिस बाज़ार सभी... बात काटते हुए अम्बा जो है वहीं कहीं जाय.
 रेणु  :जी सर हम बेटियों का वजूद और प्रभाव तो कुछ हो सके.  साहसिक कार्य और सफलता का मतलब लडके/ बेटे यह  तो न हो 
प्रो- झेपते हुए ठीक है, ठीक है

नेपथ्य  स्वर -  राज्य के 12 बोर्ड मे अधिकतर छात्र संख्या पास हुए है लेकिन सबके लिए उच्च शिक्षा संभव नहीं. इस बार इस महाविद्याल मे बी ए फस्ट ईयर  का 200 सीट, बीएससी का 70 और बी काम का 50 सीट पुरा भर गया.और अनेक छात्र कम मार्क्स के कारण प्रवेश से वंचित भी गये  उन्हें मौका मिलना चाहिए 

 दृश्य 5

 नेपथ्य स्वर  - हा जी हा अनेक व्यवसायिक/ तकनीकी शिक्षा है आई आई टी पालिटेक्निक, इंजिनियरिंग नर्सिंग  मेडिकल कृषि डेयरी मत्स्य इत्यादि इन जगहों पर छात्र बट जाते है बाकी डिग्री / पोस्ट डिग्री कॉलेज जिनकी प्रदेश मे 335 महाविद्यालय और 9 विश्वविद्यालय है 

फिर उसके बाद अशासकीय विश्वविद्यालय 11 और 350  महाविद्याल है. इसके बाद  स्वाध्यायी  परीक्षा और मुक्त और दूरस्थ विश्वविद्यालय के ऑप्शन भी है कोई भी अपने सुविधा अनुसार चयन कर सकते है.

महाविद्याल परिसर दो सहेली परस्पर चर्चा करतें हुए 
अम्बा- 12 वीं के अनुसार विषय तो ले लिए पर रुची के अनुरुप वैकल्पिक विषय मेरा साइस का होता तो अच्छा रहता क्योंकि माता जी मुझे डॉक्टर बनाना चाहती थी और पिताजी इंजिनियर. 
रेणु :- अच्छा तो तुम्हारी इच्छा? हाई स्कूल तक तो कोई लक्ष्य या समझ नहीं था और फिर हमारे इर्द गिर्द 12 वीं मे ओ विषय नहीं मिले अन्य जगह पढ़ने भेजा नहीं तो आर्ट ही ले ली..
तो फिर रूचि किसमे मे है? 
ओ तो इच्छा डॉक्टर बनने की थी पर...
तो अभी भी आप्सन मे जुलाजी ग्रुप ले लीजिये. आगे चलकर काम आएगा. हो सके तो नर्सिंग कॉलेज चुन लेना.
क्या ऐसा संभव है क्यों नहीं? चलिए महाविद्याल में स्थापित हेल्प डेक्स मे जाये.. ओके चलिए

दृश्य 6

हेल्प डेक्स  टेबल  एक्सपर्ट लोग उस पार बैठे हुए कुछेक सामने बैठे/  खड़े

एन ई पी के तहत प्रत्येक छात्रों को मुख्य विषय के साथ ऐच्छीक विषय और रोजगार एवं मूल्य आधारित कोर्स ले सकते है. भारतीय ज्ञान परम्परा पृथक से जो रुचिकर हो. मतलब कम्प्लीट ऐजुकेशन का पाठ्यक्रम नए केरीकुलम के आधार पर निर्मित है और हमारा प्रदेश दो वर्ष पूर्व लागु कर देश मे चर्चित है.

आकाश: अच्छा सर लेकिन पूरी तरह स्पष्ट समझ नहीं आ रहा हैं ।
आप ध्यान से सुनिए और इसे समझने सामने स्क्रीन बोर्ड देखिए उसमें सारे ऑप्शन प्ले हो रहे हैं। वेबसाइट और गुगल भी देख समझ सकते हैं।
फिर भी समझिए_

हेल्प डेक्स _ किसी भी संकाय के मुख्य तीन विषय DSC है दूसरे संकाय से  किसी एक विषय  को लेगा वह DSE होता है।पर्यावरण और भाषा सिर्फ एक सेमेस्टर मे  पढ़ना होगा वहAEC है।बाकी के संवैधानिक मूल्य  /भारतीय पंरपरा आदि का अध्ययन  है वह और कौसल विकास से संबंधित कोर्स है।

  अम्बा _ जी सर बहुत अच्छा समझ आ गया।

हेल्प डेक्स _ और हा आसपास के उद्योग जगत से आगे चर्चा और अनुबंधन किया जाएगा कि संबंधित छात्रों को अप्रेंटिश करवाया जाय ताकि उन्हें सैद्धांतिक और व्यवहारिक ज्ञान हो सके। और यह सब सेमेस्टर पद्धति में होगा।
 सेमेस्टर पद्वति के कोर्स भविष्य में विद्वार्थियों के लिए उपयोगी है  सभी विषयों की जानकारी होगी किंतु  खासकर।प्रतियोगिता.परीक्षाओं के लिए उपयोगी है। 

लेकिन  विद्वार्थियों की नियमित उपस्थिति  होना होगा । उनके लिए सरकार योजना बना रहे है जैसे बस किराया साइकिल या स्कूटी वितरण इत्यादि।

विभाग का प्रयास रहेगा कि सभी विद्वार्थी सेमेस्टर पद्वति को बारीकी से  समझ सकें हैं।

नई शिक्षा नीति केवल सरकारी नौकरी पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करेगी बल्कि छात्र को सामान्यतः ज्ञान और व्यवहार यानि लोकाचार से अवगत कराएगी। उन्हें हर तरह से दक्ष करने प्रतिबद्ध होगी।

 इसके लिए प्राध्यापकों को भी प्रशिक्षित करने योजना बनाई जाएगी ताकि हमारे देश के होनहार युवाओं को समय परिस्थिति के अनुरूप पढ़ा सके।
आजकल मोबाइल नेट में गुगल e-book सोसल,मीडिया, मेटा फेसबुक A I जैसे अत्यधिक टेक्नोलॉजी हैं E  लाइब्रेरी है ।परन्तु इन सबको कैसे अनुप्रयोग करे और महत्वपूर्ण चीजों इत्यादि को समझाए इसलिए हमारे प्राध्यापकों को सामग्री उपलब्ध करवा रहे हैं।

जी सर धन्यवाद आभार 

दृश्य 7

सभी छात्र संतुष्ट होकर क्लास रुम में प्रवेश करते हैं। और नई शिक्षा नीति की प्रशंसा करते हुए 
महाविद्यालय में स्मार्ट कक्ष, लैब लाइब्रेरी और स्वच्छ परिसर के साथ केंटिंग लिए महाविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग का प्रशंसा करते विद्यार्थी गीत गाते हुए नृत्य करते हैं ।
      
    पटाक्षेप 

डॉ अनिल कुमार भतपहरी 
9617777514
[1/8, 16:52] Dr. Anil Bhatt: सात दृश्य रहेगा मेडम 

प्रमुख पात्र 

2माता पिता 
3 छात्र 
1प्राध्यापक 
1प्राचार्य 
3हेल्प डेक्स 
कुल 10 पात्र 

यही लोग आरम्भ और अंत में नृत्य गीत प्रस्तुत करते रोचक और इंटरटेनमेंट करेंगे। क्योपकथन में रिहर्सल के वक्त चुटिले संवाद भी जोड़ सकते हैं।
[1/8, 16:52] Dr. Anil Bhatt: नृत्य गान के बाद कुछ महीने और टेस्ट परीक्षा के बाद 
छात्रों और अध्यापकों की समस्या और निदान पर तीन दृश्य और लिखा जाएगा।
फिर यह स्क्रिप्ट 10 दृश्यों में समाप्त हो जाएगी।

Sunday, January 4, 2026

सुरता केयूर भूषण

सुरता केयूर भूषण 

सम्मति कब होही बिहान 

सतनाम धर्म एंव संस्कृति पर अगाध श्रद्धा रखने वाले श्रद्धेय केयूर भूषण जी से १९८७-८८ में महाविद्यालयीन शिक्षा ग्रहण करने रायपुर आते ही  मिलन - भेटन हो गये। कारक रहे हमारे पूज्य पिता सुकालदास भतपहरी  के  साहित्यिक मित्र  पं. सरयू कांत झा जी जो कि मूर्धन्य साहित्यकार विचारक और  प्राचार्य छत्तीसगढ महाविद्यालय रायपुर थे । झा साहब  कोसरंगी स्कूल में‌  प्राथमिक शिक्षा लिए  थे और जब  वहाँ हाई स्कूल खुले  तब वहाँ  के प्र प्राचार्य हमारे पिता जी रहे।जब- जब वे रायपुर से अपने गृहग्राम परसदा आते तो अक्सर मुझे उन्हे अपनी राजदूत मोटर साइकिल से पहुचाने का सौभाग्य मिलता।  इस बहाने हमें  उनकी आशीष व प्रेम मिला।वे  बाल्यकाल से ही हमारी काव्य व गीत लेखन पठन को प्रोत्साहित ही नहीं दो -तीन बार सम्मानित भी किए थे। वे कोसरंगी स्कूल के विभिन्न समारोह में मुख्य या विशिष्ट अतिथि के रुप से आमंत्रित होते ही रहते थे। और अक्सर जब वे गांव में होते तो हमे ही लाने या ले जाने होते थे।
                 गुरु घासीदास छात्रावास आमापारा रायपुर में रहकर दुर्गा महाविद्यालय में अध्ययन रत रहे। हमारे संरक्षक व पिता श्री के दूर के पर सगे  मामा  स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व मंत्री कन्हैयालाल कोसरिया  जी रहे।वे और वार्डन रामाधार बंजारे जो कि अमीन पारा छात्रावास संचालित करते अक्सर केयूर भूषण जी गुरुघासीदास जयंती या अन्य समारोह मे आते । मंत्री कोसरिया जी के  शिक्षक  व कवि पुत्र रामप्रसाद कोसरिया व उनके मित्र सुशील यदु जी वही सब मिलकर ही हमे काव्य गोष्ठी में ले गये जहां स्वनाम धन्य रचनाकारों जिनमें हरिठाकुर बंसत दीवान  सरयुकांत झा मन्नुलाल यदु रामेश्वर शर्मा त्यागी जी जागेश्वर प्रसाद जी एस दिल्लीवार   जैसे  अनेक छत्तीसगढी प्रेमी साहित्यकारों /चिन्तको से हमारा परिचय हुआ और लेखन- प्रकाशन का दौर चल पडा। हमें समिति में कार्यकारिणी ‌सदस्य बनाएं गये ।
     इस बीच केयूर भूषण का बुढा- नाती वाला दुलार मिलते रहा। हमारी कृति" जय छत्तीसगढ" को   वंदना  सदृश्य  छत्तीसगढी सेवक द्वारा दी जा रही अखंड धरना गुरु घासीदास चौक के समीप कलेक्टर परिसर में २-३ बार गान करने का अवसर आया। जागेश्वर दीनदयाल वर्मा  चन्द्रशेखर वर्मा सुखदास बंजारे श्यामराव वंडलकर  डाॅ  सीताराम साहू आदि   हम लोग वहां बैठते और काव्यपाठ आदि करते । इस दरम्यान पृथक छत्तीसगढ हेतु लेख कविता लिखे छपे और फिर १९९५ -९६ में प्रध्यापकी की नौकरी करने पेन्ड्रारोड जाना हो गया और रायपुर की साहित्यिक मित्र मंडली से दूर भी ।
  ११-१२ वर्ष बाद   २००७ में हमारी काव्य संग्रह " कब होही बिहान " प्रकाशित करवाने सुधीर शर्मा भैय्या के वैभव प्रकाशन में बलौदाबाजर से आकर बैठे परिचर्चा कर ही रहे थे कि आदरणीय केयूर भूषण जी का दर्शनलाभ हुआ। प्रणाम करके अपना परिचय दिया ।थोड़ा सा स्मृत करने के उपरान्त  प्रफूल्लित हो कहने लगे बड दिन बाद मिलत हस अनिल.. कहां हस. अउ का करत हस ? एक साथ प्रश्नों  के घेरे में संक्षेप में सबकुछ बताया और कहा कि यह काव्य संग्रह प्रकाशित करवाने आया हूं ।तब सुधीर भैय्या से उतना परिचय नही था जितना केयूर भूषण जी से रहा .... वे कहे दिखाव  ..वे टाइप की हुई पांडुलिपि  देखे ... और कहे एखर भूमिका या सम्मति कोन्हो कना लिखवाय हस? मे कहेंव नहीं ... फेर का गुनत कहीस मय लिख दंव ? ... सच कहे तो मुझे ऐसा कुछ लिखवाने की ईच्छा ही नही था ।सो .... तभी सुधीर भैय्या कहे लिखवा लो ,अच्छा ही होगा ।.फिर वे उस पांडुलिपि को ले गये । हरेली त्योहार छुट्टी के दिन सम्मति और पांडुलिपी को घर  आकर ले जाने की बाते  तय हुआ  और वापस बलौदाबाजर आ गया।
        उनके घर गया बडा ही आत्मीय भाव व प्रेम मिला  और सतनाम संस्कृति मिनीमाता के अनुभव और हमारी काव्य संग्रह में वर्णित भावो पर गहन व सार्थक विचार धन्टो चला।
   सम्मति में उनके एक  शब्द  बाल्मिकी वाली वाक्य   को हटाने का निवेदन किया कि यह शायद कोई स्वीकृत करे न करे आपत्तिजन्य व कही आगे हमारे लिए अन्यान्न अर्थ न ले कोई   वे कहे- " नहीं ! मोला ज इसे लगिस ओसने लिखे हंव झन हटा ।हटाबे त मोर सम्मति ल मत रखवा।"
     प्रकाशन के बाद उन्हे भेट करने गया वह बहुत ही खुश हुआ।और अपने अनुभव सागर से हमे अनेक मोतियां निकाल देते रहें .... ऐसे सहज पर अनुभव के सागर ,सरल हृदय ,पीयर पीपर के पाके पाना ...हम जैसों को  अपनी वृहत्त धरोहर  से चंद मोतिया सौप कर जाना ....माटी के चोला माटी मे मिलना ही नहीं .बल्कि उसके बाद भी सदैव चमक बिखेरते रहना ही हैं ..... विनम्र श्रद्धांजलि सत सत  नमन
-डॉ॰ अनिल भतपहरी/ 9617777514

Saturday, January 3, 2026

बेनामी शादी में

लघु कथा 

बेनामी शादी में ...

      आजकल वे कही कोई गोष्ठी- संगोष्ठी में आमंत्रित नहीं होते।पता नहीं  कैसे अलग -थलग होते जा रहे हैं? एक समय था जब इनकी पुछ -परख  व आव भगत होते ही रहते थे ! पर इतनी जल्दी सब एकाएक बंद हो जाएन्गे ,यह सोचा नहीं था! हालांकि  अब  पहले से अधिक सोच-समझकर बोलने लगे थे।  
   
"प्रगतिशील क्या है? पहले यह निर्धारण हो।तब व्यक्ति के   प्रगतिशील होने का मूल्यांकन,  स्वत: या उनके जानने वाले लोग उस आधार पर कर सकते हैं।"
    आगे जोर देते हुए कहे -
    "असल में भारतीय मध्यम वर्ग में प्रगतिशीलता आयी ही नहीं हैं।
निम्न वर्ग की स्वच्छंदता,उनकी मजबुरी हैं और उच्च वर्ग की स्वच्छंदता उनकी ऐय्याशी हैं। "
       छिटपुट  तालियां गूंजी।
थोड़ा जोश में भरकर कहा-  
    "विचार भले प्रगतिशील हो जाय पर  प्रवृत्ति में आदमी जड़वत ही रहता हैं। बिना जड़ के वे लहलहा भी नहीं सकते।" 
ये क्या? सभागार में सन्नाटा पसर गया। 
 अर्सा़ बाद उन्हें तथाकथित  प्रगतिशील लोगों की एक संगोष्ठी में व्याख्यान के लिए आमंत्रित किए गये थे। उनकी बातें सुन  तमाम लब्ध प्रतिष्ठित अतिथियों सहित मुख्य अतिथि व आयोजक हतप्रभ सा रह गये। भौंचक एक- दूसरे से स्वयं को  छिपाते पर दूसरे में कुछ तलाशते भोजन में भीड़ गये । 
       कुछ बिना जड़ वाले उन्हे   कोसने लगे कि "प्रगतिशील मंच पर  इस तरह पुरातन पंथी जड़ वाली दकियानूसी बातें नहीं होनी चाहिए ।" कुछ कह उठे - प्रगतिवादी मंच पर ऐसी आलोचनात्मक टिप्पणियाँ आखिर  कैसे कोई कर सकते हैं। अभिव्यक्ति का आजादी का मतलब यह तो नहीं कि हमारी अस्मिता पर प्रश्न खडे किए जाय .. !
     आयोजक चिल्ला उठे - क्या करे भाई "पुरा महौल खराब कर दिए !" 
सुटेट -बुटेट ,सजे- धजे इत्र से महकते व  चहकते महफ़िल से वह बेचारा ... ऐसे निकले जैसे ....बेनामी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ! ...तभी गेट पर खड़े चौकी दार ने कहा- " साब जी ! आपकी बातें एकदम सही हैं।  बिना जड़ के जीवन कटी पतंग सा है!" ...साब जी  निकास इस तरफ हैं साब जी... जय हिन्द  !

-डॉ. अनिल भतपहरी 9617777514